– पकड़ाया ३२ टन मिलावटी पल्प
-एफडीए की कार्रवाई में बड़ा खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में जहां एक तरफ मिलावट का काला धंधा नहीं थम रहा है, वहीं इस बीच अब आम के सीजन में यही खेल सीधे लोगों की सेहत पर वार करता नजर आ रहा है। स्वाद और ताजगी के लिए जिस मैंगो जूस को लोग पीते हैं, वही अब ‘मौत का मार्ग’ बनता दिख रहा है। पुणे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई में ३२ टन मिलावटी मैंगो पल्प पकड़ा गया है, जिसमें केमिकल्स और नकली रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि बाजार में बिक रहे जूस और आमरस का हर घूंट अब संदेह के घेरे में है। फिलहाल, बार-बार कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोर बेखौफ हैं और प्रशासन की सख्ती के दावे जमीन पर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच दहशत का माहौल है और भरोसे का स्वाद अब डर में बदलता नजर आ रहा है।
गर्मियों में ठंडा-ठंडा मैंगो जूस पीते वक्त कोई कभी भी यह नहीं सोचा होगा कि जिस स्वाद का वे आनंद ले रहे हैं, वह सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है। पुणे से सामने आए एक चौंकाने वाले खुलासे ने इस भरोसे को हिला कर रख दिया है। एफडीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ३२ टन मिलावटी मैंगो पल्प जब्त किया है, जिसमें केमिकल्स और नकली रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह मैंगो पल्प वही है, जिससे जूस, जैम और आमरस जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। फिलहाल, जो चीजें रोजाना घरों तक पहुंचती हैं, उन्हीं में मिलावट कर लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा था। जांच के दौरान ‘मे. मोहम्मद एकरामुल उर्फ अक्रम गुलाम’ के ठिकाने पर छापा मारकर यह गोरखधंधा उजागर हुआ। यहां अनधिकृत रंग और रसायनों की मदद से नकली मैंगो पल्प तैयार किया जा रहा था। इस कार्रवाई में करीब २.२३ लाख रुपये का माल भी जब्त किया गया।
मुंबई में मिला था हजारों लीटर मिलावटी दूध
चिंता की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी मुंबई में हजारों लीटर मिलावटी दूध पकड़ा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद मिलावट का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा। पुणे के मावल और खेड़ जैसे इलाकों में ऐसे रैकेट का सक्रिय होना बताता है कि निगरानी और सख्ती के दावों के बावजूद जमीन पर हालात चिंताजनक हैं।
लोगों में फैला डर
इस पूरे मामले ने उपभोक्ताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि बाजार में बिकने वाले उत्पाद कितने सुरक्षित हैं और प्रशासन की कार्रवाई कितनी प्रभावी है। स्वाद के नाम पर अगर केमिकल्स परोसे जा रहे हैं, तो यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और प्रशासन मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई के साथ सख्त निगरानी तंत्र विकसित करे, ताकि लोगों की थाली में भरोसा वापस लौट सके।
