-लखनऊ का कपिल फर्जी ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे को कैश में बदलता था
भदोही, मोहलालगंज और बहराइच के साइबर महाठग गिरफ्तार
सामना संवाददाता / भदोही
उत्तर प्रदेश की भदोही पुलिस ने गुरुवार को साइबर ठगी का बड़ा खुलासा किया है। सरकारी योजनाओं और लोन दिलाने के आड़ में भोले-भाले लोगों को जाल में फंसाकर करीब 10 करोड़ रुपये ठगी की गई। पुलिस ने तीन शातिर साइबर ठगों को गुरुवार को गिरफ्तार किया है।
भदोही पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी और अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि पिछले एक साल में आरोपियों ने करीब 10 लाख रुपये की निकासी कर आपस में बांट लिए थे, जबकि कुल साइबर फ्रॉड का आंकड़ा करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंचा है।
मामला तब सामने आया जब ज्ञानपुर कोतवाली के बालीपुर निवासी अमन कुमार बिंद ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपियों ने उसके और उसकी बहन के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर एटीएम, पासबुक और लिंक मोबाइल सिम अपने कब्जे में ले लिए। शक होने पर जब उसने कागजात वापस मांगा तो आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। फिर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जाँच शुरू किया और जांच में आरोप सच पाए गए।
पुलिस गुरुवार को मुख़बीर की सूचना पर गोपीगंज ओवरब्रिज के पूर्वी छोर के पिलर नंबर 52 के सामने बस स्टैण्ड वेटिंग एरिया बने ब्रेंच से आरोपी अंशुल मिश्रा (20) निवासी कांवल चकसिखारी थाना ज्ञानपुर, मोहम्मद शोएव (19) निवासी यादवपुर महासी सबलापुर, बहराइच और कपिल रावत (19) निवासी ग्राम धरमंगत खेड़ा थाना मोहनलालगंज लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया।
एसपी के अनुसार पुलिस ने जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी युवक लोगों को सरकारी योजनाओं और सस्ते लोन का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए करते थे। गिरोह में शामिल साइबर ठग व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए देशभर के साइबर अपराधियों से जुड़ा हुआ था। निवेश, शॉपिंग और क्रेडिट कार्ड के नाम पर लोगों को फर्जी एपीके फाइल भेजकर ठगी की जाती थी और पैसा इन खातों में मंगाया जाता था।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि भदोही जनपद के अलावा इसके आसपास के जनपदो में ग्रामीण या भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं और सस्ते लोन का प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद, ये अभियुक्त उन खातों के एटीएम कार्ड, पासबुक और बैंक से लिंक मोबाइल नंबर अपने कब्जे में ले लेते थे, ताकि देश के किसी भी कोने से साइबर ठगी के जरिए जुटाया गया पैसा सीधे उन खातों में मंगाया जा सके। गिरोह के सदस्यों की जामातलाशी के दौरान इनके पास से कई मोबाइल फोन और अलग-अलग सिम कार्ड बरामद हुए, जिनमें से अधिकांश इनके परिवार के सदस्यों जैसे पिता या भाई के नाम पर पंजीकृत थे।
गिरफ्तारी करने वाले पुलिस की दो टीम में सीओ चमन सिंह चावड़ा क्राईम, उपनिरीक्षक राजकुमार पाण्डेय, नागेंद्र यादव, बृजेश सिंह सूर्यवंशी, धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, मन्नू सिंह, दीपक यादव, हिमांशु सिंह, सुनील पाल सुनील कनौजिया, प्रत्युष पाठक शामिल रहे। निरीक्षक संतोष कुमार श्रीवास्तव, देवानंद सिंह, कन्हैया कुमार सिंह , सदानंद, प्रभातचंद्र त्रिपाठी, मानसिंह यादव, गणेश कौशल शामिल रहे।
