-ठेकेदार पर `१ करोड़ का जुर्माना लगाकर, प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
जेदवी / मुंबई
शहर में तेजी से चल रहे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के बीच मेट्रो निर्माण कार्यों में लगातार सामने आ रही घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। १५ अप्रैल २०२६ को तड़के करीब ४:३० बजे बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में मेट्रो लाइन २बी के निर्माण के दौरान ४०० टन की मोबाइल क्रेन पलटने की घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि रु१ करोड़ का जुर्माना लगाकर क्या एमएमआरडीए अपनी जिम्मेदारी से बच सकती है।
यह हादसा एशियन हार्ट हॉस्पिटल जंक्शन के पास उस समय हुआ, जब एक प्री-कास्ट बीम को उठाने का काम चल रहा था। अचानक क्रेन असंतुलित होकर पलट गई। घटना के बाद गिरी हुई क्रेन को हटाने के लिए ६०० टन क्षमता वाली दूसरी भारी क्रेन मंगवानी पड़ी। राहत कार्य के चलते बीकेसी की मुख्य सड़क पूरे दिन बंद रही और यातायात को आंतरिक मार्गों की ओर मोड़ना पड़ा, जिससे पूरे इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
हादसे के बाद एमएमआरडीए ने लापरवाही के आरोप में मुख्य ठेकेदार कंपनी जे कुमार इन्प्रâाप्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर रु१ करोड़ का जुर्माना लगाया है। साथ ही सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। एमएमआरडीए ने अपनी सफाई में कहा है कि यह दुर्घटना यांत्रिक खराबी के कारण हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि क्रेन के लिफ्टिंग बूम में गियर फेलियर हुआ, जिससे अचानक भार दूसरी क्रेन पर स्थानांतरित हो गया और वह असंतुलित होकर पलट गई। प्राधिकरण का यह भी कहना है कि बीकेसी में बुलेट ट्रेन स्टेशन के निर्माण के कारण जगह की कमी थी, इसलिए क्रेन को सड़क पर तैनात करना पड़ा।
हालांकि, सवाल यह है कि क्या हर बार हादसे के बाद सिर्फ ‘तकनीकी खराबी’ का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा जा सकता है? बीते दो महीनों में मेट्रो निर्माण स्थलों पर कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। १४ फरवरी को मुलुंड में स्लैब गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद गोरेगांव में चलती कार पर लोहे की रॉड गिरने की घटना ने भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े किए थे।
गनीमत रही कि बीकेसी में यह हादसा तड़के हुआ, जब इलाके में भीड़ नहीं थी, अन्यथा बड़ा नुक्सान हो सकता था। लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर इन लापरवाहियों की जिम्मेदारी तय कौन करेगा। सवाल अब भी कायम है कि क्या केवल ठेकेदार पर जुर्माना लगाकर प्राधिकरण अपनी जवाबदेही से बच सकता है? और क्या सिर्फ जुर्माने से ही निर्माण स्थलों पर होने वाली ये घटनाएं रुक जाएंगी? मुंबई जैसे व्यस्त शहर में विकास परियोजनाओं के साथ सुरक्षा की अनदेखी आखिर कब तक जारी रहेगी?
