जेदवी / मुंबई
मुंबई की लोकल ट्रेनें आज भी भारी भीड़ और अव्यवस्था से जूझ रही हैं। ऐसे में मध्य रेलवे ने १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का ऐलान तो किया है, लेकिन इससे तत्काल राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है। बढ़ती भीड़ और अधूरे इंप्रâास्ट्रक्चर के बीच रेलवे का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है। मध्य रेलवे के अनुसार, जल्द ही तीसरी १५ डिब्बों वाली लोकल सेवा शुरू की जाएगी। फिलहाल पूरे नेटवर्क में रोजाना करीब १,८०० से अधिक लोकल ट्रिप्स चलाई जाती हैं, लेकिन इनमें से केवल दो ही १५ डिब्बों वाली ट्रेनें हैं, जो छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से कल्याण के बीच चलती हैं। ऐसे में लाखों यात्रियों की तुलना में इन ट्रेनों की संख्या नगण्य मानी जा रही है।
रेलवे का कहना है कि तीसरी १५ डिब्बों वाली लोकल शुरू होने के बाद कुल २२ ट्रिप्स (११ अप और ११ डाउन) चलाई जा सकेंगी। हालांकि, रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के मुकाबले यह संख्या कितनी प्रभावी होगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का मानना है कि यह कदम समस्या का स्थायी समाधान नहीं, बल्कि महज प्रतीकात्मक पहल है। विडंबना यह है कि मुंबई के कई रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म अब भी १२ डिब्बों वाली ट्रेनों के अनुरूप ही हैं। इसी वजह से १५ डिब्बों वाली ट्रेनों की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पा रही है। रेलवे ने ३४ प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ाने का काम शुरू करने की बात कही है, जिसमें कोपर, शहाड, मुंब्रा, कलवा, ठाकुर्ली, टिटवाला, कसारा, अंबरनाथ और बदलापुर जैसे स्टेशन शामिल हैं। इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब वर्षों से यात्रियों की संख्या बढ़ रही थी, तब प्लेटफॉर्म विस्तार का काम समय पर क्यों नहीं किया गया। अब हालात गंभीर होने के बाद ही इंप्रâास्ट्रक्चर सुधारने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इसके अलावा सीएसएमटी और कल्याण जैसे प्रमुख टर्मिनस स्टेशनों पर जगह की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्याप्त ट्रैक और स्टेबलिंग यार्ड उपलब्ध नहीं हैं। इसी को देखते हुए रेलवे दादर स्टेशन पर १५ डिब्बों वाली ट्रेनों के लिए अलग स्टेबलिंग लाइन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि यह योजना फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर ही है। जब तक नया इंप्रâास्ट्रक्चर तैयार नहीं होता, तब तक १५ डिब्बों वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया सीमित ही रहने की संभावना है। मुंबई लोकल में रोजाना होने वाली भीड़, धक्का-मुक्की और दुर्घटनाओं के खतरे के बीच यात्रियों को लंबे समय से ठोस समाधान का इंतजार है। ऐसे में केवल योजनाओं के ऐलान से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक रेलवे तेजी से इंप्रâास्ट्रक्चर विकसित कर वास्तविक रूप से ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाता, तब तक मुंबईकरों को राहत मिलती नजर नहीं आएगी।
