मुख्यपृष्ठस्तंभफोकस : करोड़ों खर्च, फिर भी सूना भायखला जू!

फोकस : करोड़ों खर्च, फिर भी सूना भायखला जू!

-४९० करोड़ की योजना, लेकिन काम का पता नहीं

-पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रेस्टोरेंट बनाने का प्रस्ताव!

-योजनाओं का शोर, लेकिन नहीं लौटी पुरानी रौनक!

जेदवी

मुंबई का ऐतिहासिक वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान तथा प्राणी संग्रहालय यानी भायखला चिड़ियाघर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए की योजनाओं और लगातार किए जा रहे दावों के बावजूद यहां की पुरानी रौनक अब तक वापस नहीं लौट पाई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में पर्यटकों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन यह बढ़ोतरी उस गिरावट की भरपाई करने के लिए नाकाफी साबित हो रही है, जो पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिली है। दरअसल, कभी मुंबई का सबसे लोकप्रिय पर्यटन केंद्र रहा यह चिड़ियाघर आज भी अपने स्वर्णिम दौर से काफी पीछे नजर आ रहा है।

आंकड़े बढ़े, लेकिन तस्वीर अभी भी फीकी
चिड़ियाघर प्रशासन और मनपा के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल २०२५ से मार्च २०२६ के बीच भायखला जू में २५.४२ लाख पर्यटक पहुंचे। इससे करीब ९.८५ करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। यह संख्या पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग ७ प्रतिशत अधिक जरूर है, लेकिन यदि पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डाली जाए तो स्थिति उतनी संतोषजनक नहीं दिखती। वित्त वर्ष २०२४-२५ में चिड़ियाघर में २३.५७ लाख पर्यटक आए थे और ९.१८ करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। वहीं २०२३-२४ में यह संख्या २८.९७ लाख तक पहुंची थी और आय ११.४६ करोड़ रुपए रही थी। स्पष्ट है कि मौजूदा आंकड़े अभी भी उस स्तर से काफी नीचे हैं, जब भायखला जू में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती थी।
खाली बाड़े बन रहे निराशा की वजह!
चिड़ियाघर की घटती लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां नए आकर्षणों की कमी को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से यहां कोई बड़ी नई प्रजाति नहीं लाई गई है, जिससे लोगों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। सबसे बड़ी कमी एशियाई शेरों की है। चिड़ियाघर प्रशासन वर्ष २०१४ से शेरों की जोड़ी लाने का इंतजार कर रहा है, लेकिन यह योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। हाल ही में मुंबई की मेयर ने गुजरात सरकार को पत्र लिखकर शेरों की जोड़ी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, मगर इस पर अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसके अलावा चिड़ियाघर के कई बाड़े लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिनमें- गैंडे का बाड़ा, ऊदबिलाव का बाड़ा शामिल हैं। इन खाली बाड़ों के कारण चिड़ियाघर का आकर्षण और भी कम हो गया है।
छुट्टियों में बढ़ी भीड़, लेकिन स्थायी नहीं
अधिकारियों के अनुसार, पूरे वर्ष में नवंबर महीने के दौरान सबसे अधिक पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे। इसके पीछे मुख्य वजह स्कूलों की छुट्टियां और स्कूलों व एनजीओ के साथ मिलकर चलाए गए जागरूकता कार्यक्रम बताए जा रहे हैं। हालांकि, यह भीड़ अस्थायी साबित हुई और पूरे साल के आंकड़ों में इसका बड़ा असर नहीं दिखा।
४९० करोड़ की योजना, लेकिन परिणाम का इंतजार
चिड़ियाघर को फिर से आकर्षक बनाने के लिए ४९० करोड़ रुपए की बड़ी विस्तार योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
मुख्य परियोजनाएं
अंडरवॉटर ग्लास टनल एक्वेरियम
दिसंबर २०२६ तक पूरा करने का लक्ष्य-इसमें ७० से अधिक समुद्री प्रजातियों को रखने की योजना, विदेशी प्राणी क्षेत्र लगभग १० एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। इसमें अप्रâीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के जानवर जैस जिराफ, जेब्रा, चीता और जगुआर रखने की योजना है।
विशेष थीम रेस्टोरेंट
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ऐसा रेस्टोरेंट बनाने का प्रस्ताव है, जहां से जानवरों के बाड़ों का सीधा नजारा दिखेगा।
मुलुंड में नया बर्ड पार्क
भायखला चिड़ियाघर के विस्तार के रूप में मुलुंड में एक आधुनिक बर्ड पार्क विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पक्षी प्रेमियों को आकर्षित करना और शहर में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है।
पुरानी पहचान लौटाने की लंबी राह…
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चिड़ियाघर में नई प्रजातियों को लाने, आधुनिक सुविधाएं विकसित करने और बेहतर प्रबंधन लागू करने पर गंभीरता से काम किया जाए, तो यह ऐतिहासिक स्थल फिर से मुंबई के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है, लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है कि करोड़ों रुपए की योजनाओं और दावों के बावजूद भायखला जू की पुरानी रौनक लौटने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।

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