सब उठो, मैं भी उठूं, तुम भी उठो, तुम भी उठो,
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएगी। – कैफी आजमी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गाजा में निर्दोष बच्चों / स्त्रियों / नागरिकों की मौतों की ‘कड़ी निंदा’ की है और गाजा में तत्काल युद्धविराम की मांग की है। मेलोनी के इस रुख ने वास्तव में कई विश्लेषकों को चौंकाया है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इटली के इजराइल के साथ मजबूत संबंध रहे हैं।
गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना करनेवाले अन्य प्रमुख देशों के राष्ट्र प्रमुखों की सूची काफी लंबी है। यहां कुछ मुख्य नाम और उनके रुख दिए गए हैं:
दक्षिण अप्रâीका (सिरिल रामाफोसा)
दक्षिण अप्रâीका इस विरोध में सबसे आगे रहा है। राष्ट्रपति रामाफोसा के नेतृत्व में ही दक्षिण अप्रâीका ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (घ्ण्व्) में इजरायल के खिलाफ ‘नरसंहार’ का मामला दर्ज कराया है। उन्होंने बार-बार इसे ‘रंगभेद’ से भी बदतर स्थिति बताया है।
ब्राजील (लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा)
राष्ट्रपति लुला ने सबसे मुखर होकर इजरायल की कार्रवाई की तुलना होलोकॉस्ट से कर दी थी, जिससे एक बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से इसे ‘सैनिकों का सैनिकों के खिलाफ युद्ध नहीं, बल्कि सैनिकों का महिलाओं और बच्चों के खिलाफ युद्ध’ करार दिया।
स्पेन (पेड्रो सांचेज)
यूरोपीय संघ के भीतर स्पेन सबसे बड़ी आलोचनात्मक आवाज बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री सांचेज ने न केवल इजरायल की कार्रवाई की निंदा की, बल्कि हाल ही में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देकर इजरायल को कड़ा कूटनीतिक संदेश भी दिया है।
तुर्की (रेसेप तैयप एर्दोगन)
राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना आधुनिक समय के ‘हिटलर’ से की है। तुर्की ने इजरायल के साथ अपने सभी व्यापारिक संबंध भी पूरी तरह से निलंबित कर दिए हैं।
आयरलैंड (साइमन हैरिस)
आयरलैंड के नेतृत्व ने फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति गहरी सहानुभूति दिखाई है। पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर और वर्तमान पीएम साइमन हैरिस दोनों ने इजरायल की कार्रवाई को ‘प्रतिशोध’ बताया है और फिलिस्तीन को राज्य के रूप में मान्यता देने में स्पेन का साथ दिया है।
कोलंबिया (गुस्तावो पेट्रो)
राष्ट्रपति पेट्रो ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध पूरी तरह से तोड़ लिए हैं और गाजा की स्थिति को ‘नरसंहार’ बताते हुए इजरायल को हथियार बेचने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं:
नॉर्वे: इन्होंने भी फिलिस्तीन को मान्यता दी है और मानवीय आधार पर इजरायल की आलोचना की है।
चिली: राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक ने इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है और मानवाधिकारों के उल्लंघन का कड़ा विरोध किया है।
एशियाई देशों में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के प्रति विरोध और निंदा का स्वर काफी मुखर रहा है। कई देशों ने न केवल आधिकारिक बयान जारी किए हैं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी कड़े कदम उठाए हैं।
यहां प्रमुख एशियाई देशों का विवरण दिया गया है, जिन्होंने इस मुद्दे पर इजरायल की खुलकर निंदा की है:
मलेशिया (प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम)
एशिया में मलेशिया सबसे मुखर देशों में से एक रहा है। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इजरायल की कार्रवाई को ‘बर्बरता’ और ‘नरसंहार’ करार दिया है। मलेशिया ने कड़ा कदम उठाते हुए इजरायल की सबसे बड़ी शिपिंग कंपर्नी ैंघ्श् के जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रुकने से प्रतिबंधित कर दिया है। अनवर इब्राहिम ने पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों की भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कड़ी आलोचना की है।
इंडोनेशिया (निवर्तमान और नवनिर्वाचित नेतृत्व)
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश के रूप में इंडोनेशिया का रुख बेहद सख्त रहा है। राष्ट्रपति जोको विडोदो और उनके उत्तराधिकारी प्रबोवो सुबियांतो दोनों ने इजरायल की निंदा की है। इंडोनेशिया ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (घ्ण्व्) में दक्षिण अप्रâीका द्वारा दायर ‘नरसंहार’ के मामले का पुरजोर समर्थन किया है और संयुक्त राष्ट्र में भी फिलिस्तीन के हक में प्रमुख भूमिका निभाई है।
तुर्की (राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन)
तुर्की ने इजरायल के साथ अपने सभी व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है। राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल के प्रधानमंत्री की तुलना ‘हिटलर’ से की है और बार-बार यह कहा है कि इजरायल एक ‘आतंकवादी राज्य’ (ऊीrदr ेूaूा) की तरह व्यवहार कर रहा है। तुर्की ने गाजा में हो रहे हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
कतर (अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी) कतर ने न केवल हमलों की निंदा की है, बल्कि इसे ‘एक राष्ट्र का सामूहिक विनाश’ बताया है। हालांकि, कतर मध्यस्थ (श्ग्aूदr) की भूमिका में है, लेकिन उसके नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि इजरायल को नागरिकों और अस्पतालों पर हमला करने का कोई अधिकार नहीं है।
चीन (विदेश मंत्री वांग यी)
चीन ने अपने पारंपरिक रुख से कहीं अधिक कड़ा रुख अपनाया है। चीन ने कहा है कि इजरायल की कार्रवाई ‘आत्मरक्षा के दायरे से बाहर’ जा चुकी है। बीजिंग ने बार-बार फिलिस्तीन के लिए ‘संपूर्ण राज्य’ (ऊैद-ेूaूा ेदत्ल्ूग्दह) की वकालत की है और गाजा में ‘सामूहिक हत्याओं’ को तुरंत रोकने की मांग की है।
खाड़ी देश (कुवैत, ओमान और सऊदी अरब)
ङ कुवैत और ओमान: इन दोनों देशों ने बहुत ही कड़े शब्दों में इजरायल के हमलों को युद्ध अपराध बताया है। ओमान के मुफ्ती और नेतृत्व ने इजरायली उत्पादों के बहिष्कार का भी समर्थन किया है।
ङ सऊदी अरब: हालांकि सऊदी अरब शांति प्रक्रिया में शामिल रहा है, लेकिन उसने गाजा में नागरिकों के ‘नरसंहार’ और विस्थापन की कड़ी निंदा की है और इसके चलते इजरायल के साथ होने वाले संभावित सामान्यीकरण समझौतों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
ङ पाकिस्तान: इसने इजरायल को एक हमलावर शक्ति बताते हुए उसके खिलाफ युद्ध अपराधों की जांच की मांग की है।
ङ मालदीव: मालदीव ने हाल ही में इजरायली पासपोर्ट धारकों के अपने देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
इन देशों का सामूहिक तर्क यही है कि आत्मरक्षा के नाम पर निर्दोष नागरिकों, बच्चों और अस्पतालों को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।
प्रस्तुति: रमन: मुंबई
