मुख्यपृष्ठग्लैमरसावित्रीबाई का किरदार जीवन का सबसे सार्थक अनुभव-पत्रलेखा

सावित्रीबाई का किरदार जीवन का सबसे सार्थक अनुभव-पत्रलेखा

हिमांशु राज / मुंबई

समाज सुधारक ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले की प्रेरणादायक कहानी पर बनी फिल्म ‘फुले’ को रिलीज हुए एक साल पूर्ण हो गया। इस फिल्म ने इतिहास को आम दर्शकों तक पहुँचाया और उनके संघर्ष की भावनाओं को जीवंत कर दिया। सावित्रीबाई की भूमिका में पटलेकhaa की शांत लेकिन प्रभावशाली अदाकारी ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली।
एक साल पूरे होने पर पत्रलेखा ने अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने कहा, “सावित्रीबाई फुले का किरदार निभाने का मौका मिलना मेरे लिए गौरव की बात है। यह केवल भूमिका नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी थी। उनके जीवन के बारे में जितना पढ़ा, उतना ही लगा कि वे अपने समय से सदियों आगे थीं। उनकी कहानी का छोटा-सा भी हिस्सा परदे पर उतारना मेरे करियर का सबसे सार्थक पल रहा।”
फिल्म ने शिक्षा, जाति सुधार और महिलाओं के अधिकारों जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा छेड़ी। शैक्षणिक संस्थानों और सोशल मीडिया पर इसे बार-बार देखा गया। सावित्रीबाई की विरासत को पाठ्यपुस्तकों से इतर समझने का यह बेहतरीन माध्यम बना। पत्रलेखा ने नाटकीयता से हटकर सावित्रीबाई के दृढ़ संकल्प और शांत बल को उभारा, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करने वाला रहा।
निर्देशक अनंत महादेवन की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस से अधिक अपनी प्रासंगिकता के लिए याद की जा रही है। पत्रलेखा के लिए यह किरदार अब भी प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। समाज सुधार की इस कहानी ने साबित किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन ही नहीं, जागृति का माध्यम भी हो सकता है।

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