संजय राऊत
महिलाओं पर अत्याचार, लैंगिक शोषण के अनगिनत अपराधों के कारण महाराष्ट्र में हाहाकार मचा हुआ है। महाराष्ट्र में कानून का शासन है, ऐसा चित्र दिखाई नहीं देता। गुंडों में सरकार और कानून का डर नहीं बचा है। भाजपा और उनके मित्र दलों की सरकार है, लेकिन नारी शक्ति पर हो रहे अन्याय का ठीकरा मुख्यमंत्री फडणवीस जैसे नेता विपक्षी दलों पर फोड़ रहे हैं।
मोदी-शाह लोकसभा में निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन का विधेयक लाए। लोकसभा में वर्तमान में ५४३ सीटें हैं। उन्हें बढ़ाकर ८५० सीटें की जाएं और ८५० निर्वाचन क्षेत्र अमित शाह की मर्जी से तैयार करनेवाला डिलिमिटेशन कमिश्नर उस पद पर बिठाया जाए यह साजिश विपक्ष की एकजुटता ने नाकाम कर दी। इस पूरे मामले का महिला आरक्षण विधेयक से कोई संबंध नहीं है, फिर भी मुंबई में महिलाओं का एक मोर्चा निकालकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, ‘यह कैसा अन्याय है? महिला अधिकार देनेवाला विधेयक ही नहीं गिराया, बल्कि महिला उत्थान के आंदोलन को ही विपक्ष ने खत्म कर दिया।’ विपक्षी दलों के खिलाफ सत्ताधारियों ने मोर्चा निकालकर खुद का मजाक बनवाया।
फडणवीस कानून के स्नातक हैं। इसलिए उन्हें पता है कि विपक्ष ने किस विधेयक को पराजित किया है, लेकिन नारी शक्ति वंदन क्या है? महिला उत्थान का आंदोलन क्या है? महाराष्ट्र में नारी शक्ति ने क्या पराक्रम किए हैं? इसका इतिहास पता न होने के कारण भाजपा तांडव कर रही है।
जिम्मेदारी लें
यदि महाराष्ट्र की नारी शक्ति का ऊर्जा स्रोत श्री फडणवीस हैं तो उन्हें कुछ चीजों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
-भाजपा का प्रचारक रहा नासिक का खरात बाबा पिछले तीन वर्षों से अनगिनत महिलाओं का शोषण और उन पर अत्याचार कर रहा था। भाजपा सरकार ने उसे पूरी तरह से नजरअंदाज किया, लेकिन जब पक्की खबर मिली कि एकनाथ शिंदे उस बाबा के पास जाते हैं और उनके खिलाफ जादू-टोना, होम-हवन करते हैं, तब मुख्यमंत्री ने खरात बाबा के खिलाफ कठोर कार्रवाई की। कार्रवाई करने के लिए उनका अभिनंदन, लेकिन सच यह भी है कि कार्रवाई सही समय पर क्यों नहीं हुई?
-मुंबई समेत राज्य में नशे का बाजार बढ़ गया है। युवाओं तक खुलेआम नशे की गोलियां पहुंच रही हैं। इसमें कई बच्चों ने जान गंवाई है। इस नशे के व्यापार की सूत्रधार एक ‘नारी’ अश्विनी पॉल निकली। इस नारी शक्ति का अब क्या करेंगे? पुलिस कार्रवाई अब हुई है, लेकिन तब तक बड़ा नुकसान हो चुका है।
भाजपा की महिला उत्थान और महिलाओं को अधिकार देने की परिभाषा अलग है। चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में १,५०० से १० हजार रुपए डालकर यह बताना कि हम ही महिलाओं के तारनहार हैं और उनके अनुसार यही नारी शक्ति वंदन है। इस तरह महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के बजाय उन्हें राजनीतिक गुलाम और परावलंबी बनाया गया। बिहार चुनाव से पहले मतदान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक करोड़ महिलाओं के खातों में १० हजार रुपए ट्रांसफर किए और बदले में भाजपा के लिए वोट लिए। महाराष्ट्र में भी वही हुआ, लेकिन वही मोदी ‘नारी’ शक्ति के मामले में कितने संवेदनशील हैं, यह देखिए-
-श्री मोदी ने अपनी पत्नी जसोदाबेन को उनके अधिकार कभी भी मिलने नहीं दिए।
-प्रधानमंत्री बनने के बाद ही मोदी अपनी वृद्ध मां से मिलने जाने लगे। वह भी वैâमरों व दल-बल के साथ।
-मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनके राज्य में सर्वाधिक कुपोषित महिलाएं थीं। इस पर मोदी कहते थे, ‘कुपोषित महिलाओं की चिंता न करें। यहां की महिलाओं को अपनी फिगर बरकरार रखनी है, इसलिए वे दुबली-पतली हैं।’
-मोदी ने राजनीति की प्रतिष्ठित महिलाओं को ‘विधवा’, ‘जर्सी गाय’, ‘शूर्पणखा’, ‘५० करोड़ की गर्लप्रâेंड, जैसी उपाधियां से अपमानित किया।
-मणिपुर आज भी जल रहा है और महिलाएं सरेआम सड़कों पर अपमानित की जा रही हैं। मोदी सहित पूरी भाजपा मणिपुर में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर चुप है।
-नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करनेवाले जेप्रâी एपस्टीन के खास मित्र आज भी मोदी के मंत्रिमंडल में हैं।
-लेखिका और पत्रकार मधु किश्वर ने मोदी के संदर्भ में जो बयान दिए हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
-लोकसभा में वर्तमान में ५४३ सांसद हैं। इसी संख्या में महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, विपक्ष की यह भूमिका सही होने के बावजूद मोदी उस भूमिका का विरोध करते हैं, क्योंकि वे दिल से नहीं चाहते कि महिलाओं को आरक्षण मिले।
-नारी शक्ति को इतना ही सम्मान देना है तो देश के प्रधानमंत्री पद पर किसी सक्षम महिला को और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री पद पर महिला नेताओं को बिठाना चाहिए। ‘नारी’ अपने आप ही शक्तिमान हो जाएगी।
-बलात्कार के आरोप में सजा काट रहे (हाथरस बलात्कार मामला) कुलदीप सेंगर का समर्थन भाजपा के ही एक सांसद निशिकांत दुबे करते हैं। क्या मोदी को महिलाओं की आबरू की ये उड़ती धज्जियां मंजूर हैं?
अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी को ‘नारी शक्ति’ के नाम पर राजनीति करनी है।
महाराष्ट्र में शाहू, फुले, आंबेडकर ने नारी शक्ति को ताकत दी। भाजपा का इन तीनों विभूतियों के विचारों से कोई संबंध नहीं रहा।
त्यागमूर्ति का अपमान
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी महिला हैं, लेकिन अयोध्या के राम मंदिर प्रतिष्ठापना समारोह और नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति रूपी नारी शक्ति को एक साधारण निमंत्रण तक नहीं था। यह क्यों? वर्तमान में भारतीय नारी का केवल वोट बैंक और राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति हर जगह मातृवंदन करती आई है। भाजपा जब भ्रूण अवस्था में भी नहीं थी, तब से हम ‘मातृभूमि’ और ‘मातृदेवो भव’ कह रहे हैं। भारत यानी मां। भारतवर्ष में हर जगह माता और पत्नी का महिमामंडन होता है।
क्या भाजपा ने कभी इन त्यागमूर्ति महिलाओं का सम्मान किया है?
भाजपा को चुनाव जीतने के लिए चुनाव जितानेवाली, जीतने के बाद ‘नमो नमो’ भजन में मग्न होनेवाली और देवाभाऊ के नाम पर तालियां बजाने वाली नारी शक्ति चाहिए।
यह ढोंग है। उस ढोंग की लोकसभा में हार होने पर झांसी की रानी, अहिल्याबाई होल्कर, महारानी तारारानी और इंदिरा गांधी स्वर्ग में खुश हुई होंगी।
