४० फीसदी भारतीय अमेरिका से बटोर रहे बोरियां-बिस्तर
कार्नेगी सर्वे में हुआ खुलासा
कल तक जो लोग डॉलर में कमाने और सिलिकॉन वैली में बसने के सपने देखते थे, आज उनमें से हर चौथा शख्स अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की सोच रहा है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की २०२६ की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। आखिर महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका में ऐसा क्या हुआ कि ४० फीसदी भारतीय अब वहां से भागना चाहते हैं? सर्वे के मुताबिक, मौजूदा समय में अमेरिका में भारतीय मूल के ५२ लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकतर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बारे में निगेटिव विचार रखते हैं। खासतौर से उनमें ट्रंप प्रशासन के प्रति घरेलू अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नीति और इमिग्रिशन से निपटने के तरीके को लेकर असंतोष है।
पलायन की सोच रखने वाले ५८ फीसदी लोगों ने सबसे बड़ी वजह ‘राजनीतिक माहौल’ को बताया है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान ध्रुवीकरण काफी ब़ढ़ा है। ७१ फीसदी भारतीय अमेरिकी ट्रंप के कामकाज से असंतुष्ट हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक समावेश और अपनेपन की भावना में आई कमी ने भारतीयों को बेचैन कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की कुछ नीतियों ने यह संदेश दिया है कि ‘अमेरिका सिर्फ अमेरिकियों के लिए है’, जिससे भारतीयों के मन में अपनी पहचान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा और भेदभाव की चिंता
करीब ४१ फीसदी लोगों ने पर्सनल सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। बढ़ते भेदभाव और सामाजिक तनाव के कारण कई प्रवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि वे दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
महंगाई और बढ़ती लागत से बढ़ी परेशानी
अमेरिका में रहना दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। न्यूयॉर्क और सैन प्रâांसिस्को जैसे शहरों में किराया ३००० से ५००० डॉलर तक पहुंच गया है। एक बच्चे की परवरिश पर लाखों डॉलर खर्च हो रहे हैं। करीब ५४ फीसदी लोगों ने महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को अपनी बड़ी चिंता बताया है।
एक सपना था, ‘अमेरिकन ड्रीम’, डॉलर की चमक, सिलिकॉन वैली की नौकरी, बड़ा घर और बड़ी गाड़ी। लाखों भारतीयों ने यह सपना देखा और अमेरिका पहुंचे, लेकिन अब कार्नेगी एंडोमेंट का एक सर्वे आया है, जो कहता है कि `१० में से ४ इंडियन-अमेरिकन्स अमेरिका छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं।
