मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
खुद को आईएएस बताकर कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बनकर लोगों से ठगी करने वाली विप्रा शर्मा समेत तीन बहनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में सामने आया कि विप्रा यूपीएससी में चयनित नहीं हो सकी थी, जिसके बाद उसने ठगी का रास्ता अपनाया। बाद में उसने अपनी बड़ी बहन शिखा पाठक और ममेरी बहन दीक्षा को भी इस गिरोह में शामिल कर लिया। तीनों मिलकर लोगों को नौकरी का झांसा देकर फंसाती थीं और उनसे पैसे ऐंठती थीं। पुलिस ने आरोपियों के खातों से 55 लाख रुपये फ्रीज किए हैं, जबकि 4.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। तीनों को जेल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लायल ने बारादरी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात शिखा पाठक से हुई थी। शिखा ने उन्हें बताया कि उसकी बहन डा. विप्रा शर्मा एसडीएम है और वह पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलवा सकती है। शिखा ने यह भी कहा कि यूपीएसएसएससी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्तियां होने वाली हैं, जिनमें उसकी बहन मदद कर सकती है।
इस झांसे में आकर प्रीति लायल ने अपने साथियों आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष कुमार को भी इस बारे में बताया। इसके बाद सभी लोग ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी विप्रा शर्मा और शिखा से मिलने पहुंचे। आरोप है कि विप्रा शर्मा और उनके पिता विरेंद्र कुमार शर्मा ने सभी को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसके बदले में मोटी रकम वसूली। प्रीति लायल से दो लाख रुपये, आदिल खान से 1.80 लाख रुपये, मुशाहिद अली से 5.21 लाख रुपये और संतोष कुमार से दो लाख रुपये लिए गए।
कुछ समय बाद आरोपियों ने आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, लखनऊ के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर दिए। इन दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर कर अभ्यर्थियों को सौंपा गया। जब अभ्यर्थियों ने इन नियुक्ति पत्रों की जांच कराई तो पूरा मामला फर्जी निकला।
इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर बारादरी पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने विप्रा शर्मा और शिखा शर्मा को गिरफ्तार किया, जबकि पूछताछ में ममेरी बहन दीक्षा का नाम सामने आने पर उसे भी हिरासत में लिया गया। फिलहाल तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
