राजेश सरकार
प्रयागराज। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर वर्ष होने वाली बैठकों में सख्त निर्देश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर देती है। मंगलवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में संगम सभागार में आयोजित जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक में एक बार फिर सुरक्षा मानकों को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया। हालांकि, सवाल वही बना हुआ है कि क्या इस बार निर्देशों का पालन सुनिश्चित होगा या वे फिर कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों तथा वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध वाहन आज भी स्कूली बच्चों को ढोते नजर आते हैं, जो प्रशासनिक सख्ती की वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं।
समीक्षा के दौरान विद्यालयी वाहनों की फिटनेस, चालकों की चिकित्सीय जांच, फायर एक्सटिंग्विशर और आपातकालीन निकास जैसी सुविधाओं को अनिवार्य बताया गया। इसके साथ ही चालक का पुलिस सत्यापन और वैध लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अयोग्य या बिना अनुमति वाले चालकों द्वारा वाहन संचालन पर सख्त रोक लगाने की बात दोहराई गई।
जिलाधिकारी ने सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने और विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया। एआरटीओ और यातायात विभाग को सघन जांच अभियान चलाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, स्कूलों के बाहर लगने वाले जाम को नियंत्रित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी और परिवहन यूनियन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। हालांकि, असली चुनौती बैठक के बाद शुरू होती है, जब यह तय होता है कि आदेश वास्तव में सड़कों पर लागू होंगे या फिर अवैध वाहनों के शोर में दबकर रह जाएंगे।
