सुनील ओसवाल / मुंबई
कथित चमत्कारों के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने वाले अशोक खरात मामले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। नासिक के कनाडा कॉर्नर स्थित उसके कार्यालय पर हुई छापेमारी में ऐसे सबूत मिले हैं, जिन्होंने इस पूरे प्रकरण को केवल ठगी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क की दिशा में खड़ा कर दिया है। तलाशी के दौरान एसआईटी को ‘हिराबाई सुदाम मुलाणे’ नाम की महिला के नाम पर जारी एक चेक मिला है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित महिला पीड़ित है या इस पूरे तंत्र की कोई कड़ी। इस चेक को जब्त कर लिया गया है और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस सुराग से वित्तीय अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं। इसी छापेमारी में १३.० से १४.२ साइज तक के ३५ रिंग मेजरमेंट भी बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि इनका इस्तेमाल तथाकथित ‘चमत्कारी अंगूठियां’ देने के नाम पर किया जाता था। पीड़ितों की उंगलियों का सटीक माप लेकर उन्हें विश्वास में लेना और फिर उसी के आधार पर ठगी करना, यह तरीका व्यवस्थित रूप से अपनाया गया हो सकता है। एसआईटी अब यह भी जांच रही है कि इन अंगूठियों के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया। अशोक खरात पहले से ही महिलाओं के साथ लैंगिक शोषण और धोखाधड़ी के कई मामलों में घिरा हुआ है। अब उसे सातवें प्रकरण में भी गिरफ्तार किया गया है और अदालत ने २९ अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पिछले करीब ४१ दिनों से वह लगातार पुलिस कस्टडी और जेल के बीच आ-जा रहा है। एक मामला खत्म होते ही दूसरे में गिरफ्तारी हो रही है। अब तक खरात के खिलाफ १८ मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से ९ मामलों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। जांच एजेंसियां उसके संपर्क, आर्थिक व्यवहार और संभावित सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले की दिशा अब केवल व्यक्तिगत अपराध तक सीमित नहीं रही है। एसआईटी यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या यह पूरा तंत्र एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था, जहां अंधविश्वास, मनोवैज्ञानिक दबाव और लालच का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाया जाता था। आने वाले दिनों में इस जांच से और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
