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एसआईआर पर घमासान: मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर उठे सवाल …विजय शंकर नायक ने प्रक्रिया को लोकतंत्र पर हमला बताया

झारखंड में लाखों वोटरों के प्रभावित होने की आशंका जताई

अनिल मिश्र | रांची

झारखंड की जनता को सतर्क करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय शंकर नायक ने कहा है कि राज्य में चल रही “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)” प्रक्रिया महज एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से वैध मतदाताओं को सूची से बाहर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। नायक ने कहा कि सतही तौर पर यह मतदाता सूची के सुधार की प्रक्रिया प्रतीत होती है, लेकिन जमीनी हकीकत और सामने आ रहे आंकड़े कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार, अगर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने बताया कि फेज-2 SIR के दौरान देशभर में लगभग 7.2 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि करीब 2 करोड़ नए नाम जोड़े गए। इस तरह करीब 5.2 करोड़ मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज की गई, जो कुल का 10 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सामान्य पुनरीक्षण प्रक्रिया की तुलना में काफी बड़ा है और इससे एक व्यवस्थित पैटर्न की आशंका पैदा होती है।

नायक के अनुसार, विभिन्न राज्यों में डिलीशन प्रतिशत में भारी अंतर भी सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश और गुजरात में यह आंकड़ा लगभग 13 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में करीब 11 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 10 प्रतिशत से अधिक बताया जा रहा है। वहीं केरल में 2.5 प्रतिशत, राजस्थान में 5.4 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में करीब 5.7 प्रतिशत डिलीशन दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही प्रक्रिया का अलग-अलग राज्यों में इतना असमान प्रभाव पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

झारखंड को लेकर नायक ने विशेष चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल मतदाता लगभग 2.65 करोड़ हैं, जिनमें से शुरुआती प्रक्रिया में करीब 12 लाख नामों को “संदिग्ध” श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा लगभग 71 लाख मतदाताओं की स्थिति अभी भी जांच या मैपिंग में लंबित है और 6.7 लाख से अधिक त्रुटियां चिन्हित की गई हैं। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर सामने आए 10 प्रतिशत डिलीशन का पैटर्न झारखंड में लागू होता है, तो 25 से 27 लाख मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।

नायक ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर आदिवासी बहुल इलाकों, दलित बस्तियों, अल्पसंख्यक समुदायों, गरीब और प्रवासी वर्गों को ज्यादा प्रभावित किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में मतदाताओं को “अनुपस्थित”, “डुप्लिकेट” या “स्थानांतरित” बताकर सूची से हटाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चयनात्मक बहिष्करण होगा और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की गंभीर स्थिति मानी जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, बूथ स्तर पर भी कई असामान्य गतिविधियां देखी जा रही हैं, जिनमें बूथ लेवल एजेंट्स की अत्यधिक सक्रियता, चुनिंदा इलाकों में कड़ी जांच और दस्तावेजों के नाम पर मतदाताओं को परेशान करना शामिल है।

नायक ने सवाल उठाया कि चुनाव से पहले, जब झारखंड में जल, जंगल और जमीन के मुद्दे गरम हैं और आदिवासी अधिकार बहस के केंद्र में हैं, तब SIR प्रक्रिया को इतनी तेजी से क्यों चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष होनी चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखनी भी चाहिए।

नायक ने झारखंड की जनता से अपील की कि वे सतर्क रहें और अपने मताधिकार की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि लोग तुरंत अपना नाम मतदाता सूची में जांचें, बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क करें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में आपत्ति दर्ज कराएं।

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