सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के बोरीवली इलाके से परिवहन व्यवस्था को शर्मसार करने वाला बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां ऐसे ऑटोरिक्शा वर्षों से सड़कों पर फर्राटा भरते रहे, जिनके असली मालिक दुनिया छोड़ चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मालिकों की मौत के बाद भी उनके नाम पर परमिट रिन्यूअल, फिटनेस पासिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं धड़ल्ले से जारी रहीं। इस खुलासे के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, मृत व्यक्तियों के नाम पर कई रिक्शे लंबे समय से चलाए जा रहे थे। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी सिस्टम को खुली चुनौती दी जा रही थी। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह खेल इतने वर्षों तक वैâसे चलता रहा?
मामला उजागर होते ही प्रशासन हरकत में आया और कुछ संदिग्ध ऑटोरिक्शा जब्त किए गए हैं। पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में एजेंटों और विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर अवैध तरीके से परमिट और वाहन पासिंग की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी। इस घोटाले ने बोरीवली परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों का आरोप है कि विभाग में बिना ‘सेटिंग’ के कोई काम नहीं होता, जबकि भ्रष्ट तंत्र की आड़ में फर्जीवाड़ा खुलेआम चलता रहता है।
अब परिवहन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि मृत मालिकों के नाम पर आखिर कितने ऑटोरिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे थे और इस पूरे रैकेट में किन-किन लोगों की मिलीभगत थी। अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घोटाले के असली चेहरे बेनकाब होंगे या मामला जांच की फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
