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संपादकीय : चलो, कम से कम ‘वॉशिंग मशीन’ को तो फांसी पर लटका दो!

भारत में भ्रष्टाचार रोकने और भ्रष्टाचारियों को दंडित करने के लिए अनेक कानून मौजूद हैं। प्रधानमंत्री द्वारा ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ जैसी राष्ट्रीय घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि भ्रष्टाचार में लिप्त सभी ‘खाऊ’ लोग भाजपा में शामिल हो जाते हैं। इस कारण भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पृष्ठभूमि में, चीन से आई एक खबर अत्यंत महत्वपूर्ण लगती है। चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों वेई फेंगे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के आरोपों में गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई गई। चीनी सैन्य अदालत ने यह पैâसला सुनाया। फेंगे को रिश्वतखोरी के लिए दोषी पाया गया, जबकि शांगफू को रिश्वत लेने और देने दोनों आरोपों में दोषी माना गया। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इन दोनों नेताओं को २०१४ में कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। ये दोनों ही पार्टी और सरकार में अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। वे चीन के वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अत्यंत करीबी माने जाते थे, लेकिन जैसे ही भ्रष्टाचार का मामला सामने आया, दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। सैन्य अदालत में मुकदमा चला और अब उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। बीजिंग की यह घटना अभूतपूर्व है। चीन जैसा राष्ट्र भ्रष्टाचारियों के प्रति कितना कठोर है, यह स्पष्ट दिखाई देता है। वहां ऐसे लोगों के प्रति कोई दयाभाव नहीं है। खुद खाने की बात तो दूर, वे ‘न खाने दूंगा’ की अपनी भूमिका पर अडिग रहते हैं। इसे देखकर भारत के भ्रष्टाचार विरोधी दयनीय कानूनों पर तरस आता है। भारत में सार्वजनिक संपत्ति का गबन करनेवाले, बैंकों का कर्ज डकारने वाले उद्योगपति और राष्ट्रीय सुरक्षा के सौदों में
घोटाले करनेवालों को
न केवल राजनीतिक संरक्षण मिलता है, बल्कि उन्हें पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसी उपाधियों से सम्मानित भी किया जाता है। यह स्थिति हम सभी के लिए शर्मनाक है। दक्षिण कोरिया और जापान जैसे विकसित राष्ट्रों में वहां के पूर्व प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के अपराध में जेल जा चुके हैं। भारत में ऐसी संभावना न के बराबर दिखती है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए, जहां ममता बनर्जी की हार हुई। भाजपा नेता प्रचार के दौरान बताते थे कि ममता बनर्जी की सरकार कितनी भ्रष्ट है। लेकिन अब भाजपा ने जिन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है, वे सुवेंदु अधिकारी पहले ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में ही थे। जब वे मंत्री थे, तब उनका खुलेआम रिश्वत लेते हुए एक वीडियो भाजपा ने ही प्रसारित किया था। वही सुवेंदु अधिकारी बाद में भाजपा में आए, ‘पवित्र’ हुए और अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बन गए हैं। यह भाजपा की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई का असली चेहरा है। महाराष्ट्र, दिल्ली और कई अन्य राज्यों के ‘भ्रष्ट’ गुटों को भाजपा ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। महाराष्ट्र में तो इस मामले में हद ही पार कर दी गई। भ्रष्टाचार के आरोपों में जिनकी ‘ईडी’ जांच चल रही थी, उन मंत्रियों और विधायकों को जेल भेजने की धमकी देकर शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस जैसे दलों को तोड़ा गया और उन्हीं भ्रष्ट विधायकों की मदद से महाराष्ट्र में भाजपा ने सरकार बनाई। ‘आप’ के सांसद अशोक मित्तल के शैक्षणिक संस्थानों पर
‘ईडी’ ने छापे
मारे। यही मित्तल अगले २४ घंटों के भीतर भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा अध्यक्ष श्रीमान नबीन ने मित्तल को ‘लड्डू’ खिलाकर स्वागत किया। ऐसे हालात में भ्रष्टाचारियों को सजा वैâसे होगी? क्योंकि देश के भ्रष्टाचार का ‘गोवर्धन’ तो भाजपा की कनिष्ठ उंगली पर ही टिका हुआ है। जिन कंपनियों ने घोटाले किए और जिन पर ‘ईडी’ की कार्रवाइयां जारी हैं, वे सभी उद्योगपति भाजपा के चुनावी चंदे के सबसे बड़े दानदाता हैं। प्रधानमंत्री सेवा निधि यानी ‘पीएम केयर्स फंड’ में अब तक हजारों करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने आदेश निकाला है कि यह एक निजी निधि है और इसके बारे में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत कोई जानकारी नहीं मांगी जा सकती। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार की दाल यहीं गल रही है। यदि कोई आर्थिक हेराफेरी नहीं हुई है तो इसे छिपा क्यों रहे हो? यदि भारत को वास्तव में ‘विश्वगुरु’ या ‘विकसित भारत’ बनाना है तो सबसे पहले भ्रष्टाचारियों की ‘वॉशिंग मशीन’ बंद करनी होगी। चीन जैसा राष्ट्र भ्रष्टाचार का निर्मूलन करके ‘सुपर पावर’ बन रहा है, जबकि भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसता जा रहा है। भ्रष्टाचार ही राष्ट्र का असली शत्रु है। ऐसे शत्रुओं का जमावड़ा इकट्ठा कर सत्ता का सुख भोगने वाले लोग राष्ट्रप्रेम पर प्रवचन नहीं दे सकते। जब भी भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा सामने आता है, तो ‘लव जिहाद’ या ‘हिंदू-मुसलमान’ जैसे विषय खड़े कर दिए जाते हैं ताकि मूल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके। ये हथकंडे भारत के भविष्य के लिए घातक हैं। चीन ने अपने दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को फांसी दी है; प्रधानमंत्री मोदी यदि अपनी ‘वॉशिंग मशीन’ को ही फांसी पर लटका दें, तो भी बहुत होगा!

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