-एनसीआरबी रिपोर्ट ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
सुनील ओसवाल / मुंबई
मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है, लेकिन अब यही शहर महिलाओं के लिए डर की नगरी बनता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की २०२४ रिपोर्ट ने मायानगरी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में मुंबई देश के टॉप-३ शहरों में शामिल हो गया है। बढ़ती छेड़छाड़, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और लैंगिक अपराधों की घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की २०२४ रिपोर्ट ने मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२४ में मुंबई में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ लैंगिक अत्याचार के ४११ मामले दर्ज किए गए, जिससे महानगरों में मुंबई का नाम सबसे चिंताजनक शहरों की सूची में शामिल हो गया है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, ४११ मामलों के साथ मुंबई तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इसके बाद हैदराबाद में ३५८ और पुणे में २४४ मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस अलर्ट, लेकिन अपराधियों के हौसले बुलंद!
सोशल मीडिया का दुरुपयोग, ड्रग्स, अश्लील कंटेंट और कमजोर सामाजिक नियंत्रण को भी अपराध बढ़ने की बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि, मुंबई पुलिस की ओर से महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन, पेट्रोलिंग, निर्भया स्क्वॉड, साइबर मॉनिटरिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ते अपराध यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर महिलाओं के लिए मुंबई कितना सुरक्षित बचा है?
सख्त कानून बनाओ, वरना…
जनता हाथ में ले लेगी कानून
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य में महिलाओं और लड़कियों पर बढ़ते अत्याचारों की घटनाओं पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों को अब कानून और प्रशासन का कोई भय नहीं रह गया है। राज्यभर में अलग-अलग स्थानों पर लगातार अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं। यदि ऐसे दरिंदों को सजा देने में कानून ही बाधा बन रहे हैं, तो कानून बदले जाने चाहिए, अन्यथा आम जनता कानून हाथ में लेने पर मजबूर हो जाएगी।
