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हिंदुस्थान पर मिडिल ईस्ट वॉर की मार …. रुपया फिसला निवेशकों ने बाजार से निकाला पैसा!

सामना संवाददाता / मुंबई
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड स्तर पर पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे रुपया दबाव में आ गया है और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा आयात महंगा होने और चालू खाते के घाटे की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट की मानें तो ईरान युद्ध और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के दौरान भारतीय शेयरों से विदेशी निवेशकों की निकासी रिकॉर्ड गति से हुई, क्योंकि महंगे तेल और ऊर्जा आयात ने रुपए पर दबाव बढ़ा दिया। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से लगभग २१ अरब डॉलर निकाल लिए, जिसमें मार्च में ही करीब १३ अरब डॉलर की निकासी हुई। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ता है। आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है। यही डर विदेशी निवेशकों को भारतीय संपत्तियों से बाहर निकलने के लिए प्रेरित कर सकता है। इस स्थिति का सीधा असर तीन मोर्चों पर दिख सकता है, पहला, रुपए की कमजोरी; दूसरा, शेयर बाजार में गिरावट या अस्थिरता; तीसरा, महंगाई का दबाव।

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