सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में हर तीन में से दो अनजान कॉल्स का स्पैम होना केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है। ट्रूकॉलर की रिपोर्ट में भारत का दुनिया के पांचवें सबसे अधिक स्पैम-प्रभावित देश के रूप में सामने आना चिंताजनक है। केवाईसी, ओटीपी, बैंक डिटेल्स, लोन और क्रेडिट कार्ड के नाम पर आम नागरिक रोज ठगी के खतरे से जूझ रहा है।
सरकार साइबर अपराध रोकने के लिए हेल्पलाइन, पोर्टल और जागरूकता अभियान चलाने का दावा करती है, लेकिन जमीन पर परिणाम कमजोर दिखते हैं। फर्जी कॉल सेंटर, अवैध सिम कार्ड, डेटा चोरी और डिजिटल ठगी के नेटवर्क लगातार पैâल रहे हैं। सवाल यह है कि जब हर मोबाइल नंबर पहचान से जुड़ा है, तब ठग इतनी आसानी से लोगों तक वैâसे पहुंच रहे हैं?
स्पैम कॉल्स पर लगाम कब?
स्पैम कॉल्स अब सिर्फ परेशानी नहीं, आर्थिक अपराध का हथियार बन चुकी हैं। आम आदमी की जेब, निजी जानकारी और मानसिक शांति खतरे में है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर कठोर और परिणामकारी कार्रवाई करनी होगी।
हर ३ में से २ अनजान कॉल स्पैम
ट्रूकॉलर की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां स्पैम कॉल्स की समस्या सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में भारत को दुनिया का ५वां सबसे अधिक स्पैम-प्रभावित देश बताया गया है। पहले स्थान पर इंडोनेशिया है, उसके बाद चिली, वियतनाम और ब्राजील आते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्पैम इंटेंसिटी ६६ प्रतिशत दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि भारतीय यूजर्स को आने वाली हर तीन अनजान कॉल्स में से लगभग दो कॉल्स स्पैम हो सकती हैं। वर्ष २०२५ में ट्रूकॉलर ने दुनिया भर में ६८ अरब से अधिक स्पैम और प्रâॉड कॉल्स की पहचान की। भारत में स्पैम कॉल्स का सबसे बड़ा हिस्सा सेल्स और टेलीमार्वेâटिंग कॉल्स का है, जो कुल स्पैम गतिविधि का करीब ३६ प्रतिशत है। इसके बाद फाइनेंशियल सर्विसेज यानी लोन, क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी कॉल्स लगभग १८ प्रतिशत हैं। वहीं स्वैâम या प्रâॉड कॉल्स की हिस्सेदारी करीब १२ प्रतिशत बताई गई है। रिपोर्ट से यह भी साफ होता है कि अब स्पैम कॉल्स केवल परेशान करने वाली प्रचार कॉल्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इनमें ठगी और साइबर प्रâॉड का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। ओटीपी, केवाईसी, बैंक डिटेल्स, लोन ऑफर और क्रेडिट कार्ड जैसे बहानों से आने वाली कॉल्स आम लोगों के लिए गंभीर जोखिम बनती जा रही हैं।
दुनिया के अलग-अलग देशों में स्पैम कॉल्स का स्वरूप अलग है। इंडोनेशिया और मैक्सिको में बैंक व लेंडिंग संस्थानों से जुड़ी कॉल्स ज्यादा हैं। चिली में डेब्ट कलेक्शन से जुड़ी कॉल्स प्रमुख हैं, जबकि ब्राजील और नाइजीरिया में टेलीकॉम कंपनियों से संबंधित स्पैम कॉल्स अधिक देखी जाती हैं। भारत में खास बात यह है कि यहां टेलीमार्वेâटिंग और प्रâॉड कॉल्स दोनों का मिश्रण तेजी से बढ़ रहा है।
