मुख्यपृष्ठसमाचारबीएचयू में महाराणा प्रताप जयंती पर आयोजित हुई “महाराणा की शौर्यगाथा”

बीएचयू में महाराणा प्रताप जयंती पर आयोजित हुई “महाराणा की शौर्यगाथा”

युवाओं को दिया गया वीरता और स्वाभिमान का संदेश

उमेश गुप्ता/वाराणसी
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के के. एन. उडप्पा सभागार में 9 मई को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर “महाराणा की शौर्यगाथा” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन छात्र नेता विवेक सिंह अभिषेक और अन्य छात्र छात्राओं द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, युवाओं तथा गणमान्य लोगों की उपस्थिति देखने को मिली। पूरे आयोजन के दौरान देशभक्ति, वीरता और स्वाभिमान का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत शाम 3 बजे हुई। सबसे पहले महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद “महाराणा की शौर्यगाथा” विषय पर विशेष प्रस्तुति दी गई, जिसमें उनके अदम्य साहस, त्याग, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रतीक थे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।

कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप के साथ युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आदिवासी समाज के वीर योद्धाओं का भी विशेष रूप से सम्मान किया गया। आयोजकों ने कहा कि इतिहास में आदिवासी समाज के योगदान को अक्सर कम महत्व दिया जाता है, जबकि महाराणा प्रताप के संघर्ष में इन वीरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इस सम्मान के माध्यम से उन वीरों के बलिदान और योगदान को स्मरण किया गया।

इसके अलावा कार्यक्रम में एक भव्य झांकी भी निकाली गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह झांकी के. एन. उडप्पा सभागार से शुरू होकर मालवीय गेट, लंका तक गई और फिर वापस सभागार पहुंचकर समाप्त हुई। झांकी के दौरान युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हाथों में ध्वज और जयघोष के साथ छात्र छात्राएं महाराणा प्रताप के शौर्य और राष्ट्रभक्ति का संदेश जन जन तक पहुंचाते नजर आए।

कार्यक्रम के आयोजक विवेक सिंह अभिषेक ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा देना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए अपने इतिहास और महान वीरों के संघर्ष को जानना अत्यंत आवश्यक है। महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विनीत सिंह उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में चेतन आनंद ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि आत्मविश्वास और देशप्रेम मजबूत हो तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।

इसके अलावा विशिष्ट अतिथि के रूप में धनंजय कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, सतेंद्र बारी और डॉ. एस. एन. शंखवार भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी छात्र छात्राओं, युवाओं और नागरिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। पूरे आयोजन के दौरान सभागार में उत्साह और अनुशासन का वातावरण बना रहा और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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