बुलाकी शर्मा, राजस्थान
‘झा लमुड़ी खावण रो मन है भागवान।’ किचन कनै ऊभा हुय’र कवि धाकड़ जी आपरी घरआळी सूं मिसरी री डळी सूं ई मीठा बोल बोल्या।
रोटी बटती बा अचंभै सूं पूछ्यो, ‘गुळ राबड़ी जियां मीठा कियां बोल रैया हो कविराजजी। थांरी आ झालर मुंडी घणी मीठी हुवै क्या?’
‘ना… ना… भागवान, ‘ धाकड़ जी खुलासो करियो, ‘आ तो चरपरी, चटपटी अर मसालैदार हुवै। इसी जायकैदार कै खायां पछै ई चरमराट लाग्योड़ी रैवै।’
तवै माथै रोटी सैकती बा बोली, ‘आपांरै मारवाड़ में तो आ बणै कोनी। आ झालर मुंडी क्या हुवै अर कियां बणाइजै, म्हनैं ठाह कोनी।’
अरे यार, थूं खाली टीवी सीरियल देखती रैवै। ना अखबार बांचै, ना न्यूज चैनल देखै जणै थनै कियां ठाह लागै। पश्चिम बंगाल अर खासकरनै कळकत्तै में झालमुड़ी भोत चावी है। सगळा न्यूज चैनलां में इण री ई चरचा चाल रैई है।’
‘कठैई मछली-वछली तो कोनी हुवै इण बाळनजोगी झालर में।’ रसोई सूं बारै निकळ’र बा मूंडो बिगाड़ती बोली, ‘धरम भिस्ट करासो क्या म्हारो?’
‘नाअे झालमुड़ी शाकाहारी है। ई में मुरमुरा, कांदो, लाल टमाटर, खीरो, उबळ्योड़ा आलू, हरी मिरची, मूंगफळी, मसालो, सरसों रो तेल काम में लिरीजै।’
‘थे तो ई झालर री पूरी रैपिसी जाणो।’ घरआळी अचंभो करती आगै बोलै, इण सूं पैला ई धाकड़ जी बोल्या, ‘आपां रा प्रधानमंत्री जी नै दस रुपियां री झालमुड़ी खावतां न्यूज चैनलां लाइव देखायो अर बणावण री विधि बार-बार बताई जणै याद हुयगी। प्रधानमंत्री जी रै झाड़मुड़ी खावण रो कमाल वैâ बां ममता नै हराय दीवी।’
‘हेंअ… ल्याण थां री ममता दीदी हारगी?’ घरआळी चिंत्या करण लागी, ‘थै तो ममता दीदी री जियां पैरवी करता हा बियां थां कदैई थांरी सागी बहन री कोनी करी।’
अबै ममता… ममता वैâवणो बंद।’ धाकड़ जी धुरी मोड़ै कानी सावचेती सूं देख्यो, कोई सुण तो नीं रैयो है। फेर होळैसीक बोल्या, ‘अबै ममता-धमता री तारीफ भूल’र ई ना करियै, समझी। म्हैं फुरग्यो हूं। फुरयोड़ो सीअेम बण सवैâ जणै म्हनैं ई सरकारी इनाम-इकराम मिल सवैâ। सोशल मीडिया माथै अेक फोटू पीअेम साब री झालमुड़ी खांवतां री अर दूजी म्हारी चैपसूं…कविता लिख ली है - झालमुड़ी खाओ जीत रो उच्छब मनाओ।’
घरआळी साम्हीं देख्यो जणै बीं नै आपरै भरतार कविराज री ठौड़ रंग बदळणियो किरड़ो निजर आयो अर बा डर’र आपरै कमरै में जाय’र फुरती सूं फाटक बंद कर लियो।
