सूफी खान
ईरान यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात को इजरायल और अमेरिका का सबसे बड़ा प्रॉक्सी मानता है। मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में जंग की जरा सी भी चिंगारी भड़की तो यूएई और बहरीन की खैर नहीं रहने वाली। यूएई और बहरीन का क्या हाल करना है, ईरान इसकी प्लानिंग किए बैठा है।
इसकी वजह भी है यूएई और बहरीन खुलकर इजरायल अमेरिका के खेमे में खेल रहे हैं और वो भी ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशन की सरकार के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं। इसकी वजह है साल २०२० में ट्रंप के पिछले दौर में हुआ अब्राहम समझौता। इसके चलते यूएई और इजरायल में डिफेंस डील भी है। यूएई को इजरायल और अमेरिका ईरान के खिलाफ काउंटर बैलेंस की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह कि पिछले दिनों इजरायल से बड़ी तादाद में एडवांस हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम यूएई भेजे गए थे। आशंका यही है कि इजरायल अमेरिका मिलकर इस बार यूएई और बहरीन से ईरान पर अटैक करेंगे। फिर ईरान का शिकार भी दुबई, अबूधाबी, शारजाह जैसे शहर होंगे। यूएई भी यही चाहता है कि ईरान में मौजूदा रिजीम का पूरी तरह खात्मा हो और उसके दोस्त इजरायल पर से संकट हमेशा के लिए टल जाए। अगर बिना किसी नतीजे के अमेरिका इलाके से निकल गया तो कई अरब देशों को ईरान की दया पर रहना पड़ेगा।
वैसे भी सीजफायर के दौरान भी अगर किसी देश पर सबसे ज्यादा ईरानी मिसाइल और ड्रोन गिरे हैं तो वह यूएई ही रहा है। अमेरिका जरा सा भी तीन-पांच करता है तो ईरान की मिसाइल पहले ही यूएई में ही पहुंच जाती हैं। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट तो ये भी आंकलन कर रहे हैं कि ईरान यूएई में लगभग हर रोज मार रहा है, बस स्वीकार नहीं करता है।
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का आरोप है कि ईरान ने उसके फुजैराह पोर्ट सहित कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। हालांकि, ईरान की तरफ से न तो इसे नकारा जा रहा है और न ही स्वीकार किया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर हमले ईरान की तरफ से हुए हैं तो फिर ईरान इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है? एक्सपर्ट कहते हैं कि इसकी वजह सीजफायर हो सकता है। अगर ईरान यह मान ले कि उसने ही यूएई पर हमलोह को अंजाम दिया है तो फिर यह सीजफायर का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की सख्ती के बाद तेल सप्लाई करने वाले खाड़ी के देश खासकर यूएई इसके लिए वैकल्पिक रास्ते और तरीके भी इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना कंट्रोल बनाए रखने और वहां से ऑइल सप्लाई पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए ईरान कुछ भी करेगा।
