राजन पारकर / मुंबई
देश की आम जनता को पेट्रोल-डीजल बचाने, खर्चों में कटौती करने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की नसीहत देने वाली मोदी सरकार अब खुद अपने आचरण को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करारा पत्र लिखते हुए पूछा है कि जब जनता से संयम और बचत की अपेक्षा की जा रही है, तब प्रधानमंत्री के सरकारी दौरों में चार्टर विमानों, विशाल रैलियों और बड़े-बड़े वाहनताफों का प्रदर्शन क्यों?
पटोले ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यदि देशहित में ईंधन बचत और अनावश्यक खर्चों पर रोक आवश्यक है, तो इसकी शुरुआत सत्ता के सर्वोच्च पद से होनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री जनता को विदेश यात्राएं कम करने और ईंधन बचाने की सलाह देते हैं, वहीं दूसरी ओर स्वीडन, नॉर्वे, यूएई और इटली जैसे देशों के विदेशी दौरों की तैयारी करते हैं।
हाल ही में तेलंगाना, बंगलुरु और जामनगर के दौरों के दौरान चार्टर विमानों और भारी-भरकम सरकारी तामझाम के उपयोग पर भी पटोले ने सवाल दागे। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जनता महंगाई से त्रस्त है, लेकिन सत्ता के गलियारों में शाही खर्च पर कोई लगाम दिखाई नहीं देती।
पटोले ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जनता पर बचत का बोझ डालने से पहले जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारियों को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। चार्टर विमान, फिजूल सरकारी खर्च और बड़े वाहनताफों पर अंकुश लगाकर ही सरकार जनता के सामने ईमानदार संदेश दे सकती है।
इस पत्र ने केंद्र सरकार की कथनी और करनी के फर्क को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक हलकों में इसे मोदी सरकार की नीतियों पर तीखा हमला माना जा रहा है, जहां जनता के लिए एक नियम और सत्ता के लिए दूसरा नियम लागू होता दिख रहा है.
