प्रभुनाथ शुक्ल / भदोही
हमारा इहां रायवीरन के कमी कबो ना रहलहमारे समाज में रायवीरों की कमी कबो ना रहल। गांव के चउपाल से लेकर शहर के टीवी स्टूडियो तक, हर जगह रायवीर लोग मिल जइहे। ई लोगन के खासियत ई होला कि हर विषय पर इनकर राय तैयार रहेला। चाहे मामला खेती के होखे, अर्थव्यवस्था के होखे, क्रिकेट के होखे या चांद पर पानी खोजे के।
सबसे मजेदार बात ई बा कि रायवीर लोग दूसरन के सलाह देवे में बहुत तेज होला, लेकिन खुद ओह सलाह पर अमल करे के बेरा गायब हो जाला। कभी कहिहें, देश संकट में बा, सब लोग ताली बजाईं। जनता ताली बजा देला। फिर आदेश आई। अब थाली बजाईं। जनता ऊ भी बजा देला। कुछ दिन बाद नया ज्ञान निकल के आ जाला सोना मत खरीदिए, देशहित में खर्च कम करिए। अब गरीब आदमी सोचेला कि चलऽ ठीक बा, देश खातिर थोड़ा त्याग कर लेतानी।
लेकिन उहे रायवीर लोग पांच सितारा होटल में बैठक करेला, विदेशी गाड़ी में घूमेला आ वैâमरा बंद होते ही महंगा खाना उड़ावेला। भोजपुरी में कहें त, जनता खातिर सादगी के प्रवचन,
आ अपने खातिर ऐशो-आराम के आयोजन।
कभी कहिहें कि पेट्रोल-डीजल कम खर्च करिए।
बाकिर खुद दस-दस गाड़ी के काफिला लेकर निकलीं।
जनता साइकिल चलावे त देशभक्ति, आ बड़े लोग हवाई जहाज से घूमे त राष्ट्रहित। आजकल सोशल मीडिया पर रायवीरन के नई फौज पैदा हो गइल बा। मोबाइल हाथ में आवते लोग खुद के अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, डॉक्टर आ रणनीतिकार समझे लागेला। कवनो घटना होखे, पैâसला तुरंत तैयार। हम पहले से कहत रहीं। एह लोगन के आत्मविश्वास देख के कई बेर असली विशेषज्ञ भी शर्मा जाय। सबसे बड़ा कमाल तब होला जब ई लोग नाला से गैस, हवा से विकास आ भाषण से रोजगार पैदा करे लागेला। जनता सुनत रहेला, ताली बजावत रहेला आ सोचत रहेला कि आखिर असली काम कब शुरू होई। सच पूछल जाए त राय देना आज सबसे सस्ता काम हो गइल बा।
ना पढ़ाई चाहीं, ना अनुभव, ना जिम्मेदारी।
बस ऊंचा आवाज, थोड़ा अभिनय आ कैमरा चाहीं।
लेकिन अब जनता धीरे-धीरे समझदार हो रहल बिया।
ऊ पूछे लागल बिया। गुरुजी, जवन उपदेश रउआ हमनी के देतानी, उ खुद पर कब लागू करब।
एही सवाल रायवीरन के सबसे बड़ा डर बा।
