मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है: हत्या की सजा सिर्फ ₹५००!

गजबे है: हत्या की सजा सिर्फ ₹५००!

हालांकि इस फैले ने लोगों के मन में बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है, क्या हालात और मानसिक तनाव किसी की जान लेने के अपराध को इतना हल्का बना सकते हैं?

उमा सिंह

एक तरफ आम आदमी छोटी-सी गलती पर महीनों कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटता है, तो दूसरी तरफ हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपी को सिर्फ ५०० रुपए देकर रिहाई मिल जाती है। जी हां, आपने सही पढ़ा। हत्या की सजा के तौर पर ५०० रुपए का जुर्माना सुनकर लोग हैरान हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किसी की जान की कीमत इतनी कम वैâसे हो सकती है? क्या गुस्सा, तनाव या पारिवारिक विवाद हत्या के अपराध को हल्का बना सकते हैं? तेलंगाना हाई कोर्ट से ऐसा ही एक चौंकानेवाला फैसला सामने आया है। इस फैसले ने कानून, इंसाफ और न्याय व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
तेलंगाना हाई कोर्ट का यह फैसला लोगों को चौंका रहा है। मामला पति की हत्या का है, लेकिन सजा सुनकर लोग सिर पकड़कर बैठ गए। जिस महिला को निचली अदालत ने ४ साल की सजा दी थी, वह सजा अब घटाकर सिर्फ ५०० रुपए जुर्माना कर दी गई है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला पर आरोप था कि उसने अपने पति को चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया था। मामला गंभीर था, इसलिए ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए ४ साल जेल की सजा सुनाई थी। लेकिन जब मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तो तस्वीर बदल गई। अदालत ने कहा कि यह हत्या पहले से सोची-समझी नहीं थी, बल्कि अचानक गुस्से और तनाव में हुई घटना थी। बताया गया कि घटना के समय पति कथित तौर पर नग्न अवस्था में घर पहुंचा था और महिला के परिवार वालों को गालियां दे रहा था। इसी दौरान झगड़ा बढ़ा और मामला हिंसा तक पहुंच गया। कोर्ट ने माना कि महिला का हमला किसी साजिश का हिस्सा नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने उसकी सजा में बड़ी राहत दे दी।
लेकिन अब इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी की जान की कीमत अब सिर्फ ५०० रुपए रह गई है? कई यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा, `इतने का तो ट्रैफिक चालान भी नहीं कटता।’ वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय फैसला लिया है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव और अचानक हुए अपराधों को कानून किस नजर से देखता है। फैसले ने कानूनी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है और लोग अब भी यही पूछ रहे हैं, ‘क्या इंसाफ सच में बराबर है?’

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