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कोकण के सुपुत्र का नॉनस्टॉप शहनाई वादन बना इतिहास, ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ नाम

सामना संवाददाता / मुंबई

कोकण की मिट्टी में जन्मी पारंपरिक लोककला की विरासत को संजोते हुए रत्नागिरी जिले के दापोली तालुका स्थित इलणे गांव के सुपुत्र तथा प्रसिद्ध शहनाई वादक संदेश हरिश्चंद्र मुरुडकर ने राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। लगातार शहनाई वादन का अनोखा रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है।

संदेश मुरुडकर और उनके छोटे भाई, अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्हिसल वादक तथा दल के प्रमुख ढोल वादक रुपेश मुरुडकर पिछले 25 वर्षों से कोकण की पारंपरिक ‘खालू बाजा’ लोककला, जिसे कोली और आगरी समाज की टिमकी बाजा कला के रूप में जाना जाता है, उसका समर्पण और निष्ठा के साथ संरक्षण कर रहे हैं।

संदेश मुरुडकर ‘त्रिमूर्ति संदेश खालू बाजा और नृत्य पथक रजि.’ संस्था के अध्यक्ष हैं और प्रमुख शहनाई वादक के रूप में कार्यरत हैं।

संदेश मुरुडकर की इस रिकॉर्ड उपलब्धि तथा पथक के 25 वर्षों के गौरवशाली सफर के उपलक्ष्य में मुंबई के सांताक्रूज (पूर्व) स्थित पाठक टेक्निकल कॉलेज हॉल में भव्य रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री एड. आशिष शेलार की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में सांसद विनायक राऊत, कोली महासंघ के अध्यक्ष एवं विधायक रमेशदादा पाटील, पूर्व कुलगुरु डॉ. अर्जुनराव मुरुडकर, बिग बॉस फेम गायक संतोष चौधरी (दादूस) सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सांसद विनायक राऊत ने कलाकारों का मार्गदर्शन करते हुए लोककला को संरक्षित करने वाले कलाकारों को सरकार द्वारा अधिक सहयोग दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, कोली महासंघ के महासचिव राजहंस टपके ने भी पथक के कार्य की सराहना की।

इस अवसर पर पथक के 25 वर्षों के सफर पर आधारित पुस्तक का भी गणमान्य अतिथियों के हाथों विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष रमेशदादा पाटील ने कोली-आगरी समाज की पारंपरिक टिमकी बाजा कला को आज भी जीवित रखने के लिए मुरुडकर परिवार और उपस्थित रसिकों का आभार व्यक्त किया।

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