भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
क्या कोई अड़ोस-पड़ोस का व्यक्ति रोज आपके घर के सामने आकर कचरा डाल जाए तो क्या आप चुपचाप देखते रहेंगे? शायद नहीं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिन-रात, सुबह-शाम, कभी भी किसी भी समय व्हॉट्सऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से कितना ‘मानसिक कचरा’ आपके भीतर डाला जा रहा है और आपको इसकी खबर तक नहीं होती?
हर दिन सैकड़ों मैसेज, ज्ञान, वीडियो, फॉरवर्ड और तथाकथित मोटिवेशनल बातें हमारे दिमाग में भरी जाती हैं। लेकिन एक सवाल-क्या इस जानकारी की कोई उपयोगिता भी है? क्या इससे आपकी आर्थिक स्थिति, रिटायरमेंट प्लानिंग या भविष्य सुरक्षित हो रहा है? क्योंकि जानकारी तो आज गूगल भी दे देता है। फिर ‘व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ का यह ज्ञान आखिर किस काम का, यदि वह आपके जीवन में कोई वित्तीय अनुशासन ही पैदा नहीं कर पा रहा?
यही कारण है कि आज ५५-६० वर्ष की उम्र के कई व्यापारी और नौकरीपेशा लोग अचानक पूछने लगते हैं-‘क्या अब हमें टर्म प्लान मिल सकता है?’ सवाल यह है कि जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी व्यापार किया, परिवार चलाया, बच्चों को बड़ा किया, समाज में प्रतिष्ठा बनाई उसे जीवन के आखिरी पड़ाव में अचानक टर्म इंश्योरेंस की याद क्यों आती है?
क्या इसका सीधा कारण यह नहीं कि उसने अपनी जवानी में रिटायरमेंट फंड बनाया ही नहीं? पूरी जिंदगी कमाई हुई आय बच्चों, घर, शादी-ब्याह, सामाजिक दिखावे और रिश्तेदारियों में खर्च कर दी। जो थोड़ा बहुत बचाया था, वह भी जरूरतों के नाम पर तोड़ दिया। और फिर जब बेटों की शादी हुई, घर में नई जिम्मेदारियां आईं, तब एहसास हुआ कि बुढ़ापे के लिए अलग से कोई आर्थिक सुरक्षा बनाई ही नहीं। तभी ६० साल की उम्र में व्यक्ति सोचता है-‘कम से कम मेरे बाद पत्नी को कुछ पैसा मिल जाए।’ लेकिन सवाल यह है कि अगर समय रहते रिटायरमेंट कॉर्पस बना लिया होता, तो क्या इस उम्र में टर्म प्लान ढूंढने की जरूरत पड़ती?
आज कई लोग दूसरों को व्यापार, निवेश और कमाई की सलाह देते दिखाई देते हैं, लेकिन खुद के भविष्य की योजना नहीं बना पाते। आखिर क्यों? क्योंकि उन्होंने ‘जानकारी’ तो बहुत इकट्ठी की, लेकिन ‘वित्तीय अनुशासन’ नहीं बनाया। असल समस्या जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की कमी है। इसलिए खुद से एक सवाल पूछिए- क्या आप सिर्फ रोज नया ज्ञान जमा कर रहे हैं या अपने भविष्य के लिए वास्तविक आर्थिक सुरक्षा भी बना रहे हैं? क्योंकि जिंदगी के आखिरी पड़ाव में व्हॉट्सऐप के फॉरवर्ड नहीं, बल्कि आपका बनाया हुआ रिटायरमेंट फंड ही काम आता है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
