मुख्यपृष्ठस्तंभमहाराष्ट्र माझा : महायुति की सीटें या कुर्सियों का महाभारत?

महाराष्ट्र माझा : महायुति की सीटें या कुर्सियों का महाभारत?

राजन पारकर
विधान परिषद चुनाव का बिगुल बजते ही महायुति में भाईचारे की मिठास अचानक सीटों की गिनती में बदल गई है। भाजपा कहती है, ‘बारह हमारी’, एकनाथ शिंदे गुट कहता है, ‘सात हमारी’, और राष्ट्रवादी बीच में गणना यंत्र लेकर बैठी है। जनता सोच रही है कि चुनाव अभी बाकी है, लेकिन गठबंधन के योद्धाओं ने तो पहले ही कुरुक्षेत्र सजा रखा है। सत्ता की थाली में रोटियां अभी बनी भी नहीं, मगर हिस्से तय करने की लड़ाई शुरू हो चुकी है।
पीके का पासवर्ड और
सत्ता का सिस्टम!
मुंबई के राजनीतिक सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में इन दिनों एक ही चर्चा है, प्रशांत किशोर की मुलाकात आखिर ‘शिष्टाचार भेंट’ थी या ‘प्रणाली अद्यतन’? सत्ता के कुछ अनुभवी चेहरे तो अपने-अपने राजनीतिक सुरक्षा कवच भी सक्रिय कर चुके हैं। क्योंकि पीके जहां बैठते हैं, वहां सिर्फ चाय नहीं बनती, कई बार सरकारों की किस्मत भी उबलने लगती है!
पटकथा अभी बाकी है!
महाराष्ट्र की राजनीति ऊपर से शांत तालाब जैसी दिखाई दे रही है, लेकिन भीतर कई मगरमच्छ करवटें बदल रहे हैं। चाय की मेजों पर बैठकर जो बातें फुसफुसाहट में कही जा रही हैं, वही कल की सुर्खियां बन सकती हैं। राजनीति का नियम सीधा है, जो दिखाई दे रहा है, वह खबर नहीं जो छिपाया जा रहा है, वही असली कहानी है!
गोतस्करों के लिए ‘डायल ११२’, नेताओं के लिए कौन सा नंबर?
सरकार ने गोतस्करों पर मकोका लगाने का ऐलान किया है। अब कोई भी नागरिक ‘डायल ११२’ पर फोन कर शिकायत कर सकता है। यह अच्छी बात है। लेकिन जनता पूछ रही है कि जो लोग चुनाव के समय वादों की तस्करी करते हैं, विकास की फाइलें गायब कर देते हैं और आश्वासनों की अवैध कटाई करते हैं, उनके लिए कौन सा नंबर डायल करना होगा? गोवंश की रक्षा जरूरी है, पर लोकतंत्र की नस्ल भी बची रहनी चाहिए।

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