मुख्यपृष्ठस्तंभहनीफनामा: संजीव-सईद की दुविधा से रुकी शूटिंग!

हनीफनामा: संजीव-सईद की दुविधा से रुकी शूटिंग!

हनीफ जवेरी

फिल्म उद्योग में कलाकारों के आपसी तनाव और अहंकार के कारण कई फिल्मों की प्रगति प्रभावित होने के किस्से हम अक्सर सुनते आए हैं। लेकिन आज जिस घटना का जिक्र हम करने जा रहे हैं, उसमें अहंकार या आपसी मतभेद जैसी कोई बात नहीं थी, क्योंकि दोनों कलाकारों के संबंध मधुर और घरेलू थे। इसके बावजूद वे अपने किरदारों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे थे और वैâमरे का सामना करते समय अटपटा महसूस कर रहे थे।
जी हां, ऐसा हुआ था दो दिग्गज कलाकार संजीव कुमार और सईद जाफरी के बीच। दोनों फिल्म शतरंज के खिलाड़ी के सेट पर शूटिंग करने में कठिनाई महसूस करने लगे थे। स्थिति ऐसी बन गई कि फिल्म की शूटिंग दो दिनों के लिए रद्द करनी पड़ी। हैरत की बात यह थी कि इस फिल्म का निर्देशन महान फिल्मकार सत्यजीत रे कर रहे थे, जिनकी फिल्मों में काम करने के लिए उस दौर के कलाकार बेहद उत्सुक रहते थे। सत्यजीत रे की ओर से काम का प्रस्ताव मिलना किसी सम्मान से कम नहीं माना जाता था। कलाकार न तो उनसे पारिश्रमिक की चर्चा करने की हिम्मत करते थे और न ही अपने किरदार के बारे में अधिक पूछने का साहस जुटा पाते थे।
सत्यजीत रे की फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ का एक लंबा शूटिंग शेड्यूल कलकत्ता में चल रहा था, जिसमें खास तौर पर संजीव कुमार और सईद जाफरी भाग ले रहे थे। शूटिंग ठीक ही चल रही थी, लेकिन कुछ शॉट्स के रीटेक हो गए। यह बात संजीव को अच्छी नहीं लगी, क्योंकि वे वन-टेक अभिनेता थे। संजीव कुमार ने मांग की कि फाइनल शॉट से पहले तीन-चार रिहर्सल कराई जाएं। पहली रिहर्सल में वे संवाद याद करते, दूसरी में संवादों के साथ मूवमेंट करते, तीसरी रिहर्सल में संवाद, मूवमेंट और नजाकत भरे हावभाव पर काम करते और चौथी बार फ़ाइनल टेक देते। लेकिन सईद ने इस तरह बार-बार रिहर्सल करने में सहयोग देने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि अधिक रिहर्सल करने से फाइनल टेक के समय वे स्वाभाविक अभिनय नहीं कर पाएंगे। दोनों कलाकार अपनी-अपनी जगह सही थे। एक कलाकार रिहर्सल करके बेहतरीन अभिनय कर सकता था, जबकि दूसरा अधिक रिहर्सल के बाद अपनी अभिनय क्षमता खो देता था। दोनों की इस अलग काम करने के तरीके ने निर्देशक सत्यजीत रे के लिए आगे शूटिंग जारी रखना मुश्किल कर दिया। नतीजतन, सत्यजीत ने दो दिनों के लिए फिल्म की शूटिंग स्थगित कर दी। और इस समस्या के समाधान के लिए सत्यजीत रे जैसे फिल्मकार गहराई से सोचने लगे। यही नहीं, इस चिंता के कारण वह रातभर ठीक से सो भी नहीं पाए। कई बार उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए अपने वैâमरामैन और सहायक निर्देशक से भी विचार-विमर्श किया। उनके मन में सबसे बड़ी चिंता यही थी कि अगर यह समस्या नहीं सुलझी, तो फिल्म को समय पर वैâसे पूरा किया जा सकेगा ? अगले दिन सत्यजीत ने पूरी यूनिट के साथ इस समस्या को सुलझाने के लिए एक बैठक की, जिसमें सईद जाफरी और संजीव कुमार के साथ लेखक जावेद सिद्दीकी भी शामिल हुए। सत्यजीत ने बताया कि फिल्म की बेहतरी के लिए दोनों कलाकारों की बात मानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतिम टेक से पहले संजीव कुमार जितनी भी रिहर्सल करेंगे, उसमें सईद जाफरी की जगह जावेद सिद्दीकी उनका साथ देंगे। और जब फाइनल टेक लिया जाएगा, तब जावेद सिद्दीकी की जगह अपना किरदार निभाने के लिए सईद जाफरी आ जाएंगे। अगले दिन फिर शूटिंग शुरू हुई और संजीव कुमार और सईद जाफरी ने इतने बेहतरीन तरीके से अपने किरदार निभाए कि मेकर के जो दो दिन बर्बाद हुए थे, उनकी भरपाई भी हो गई। इस तरह बिना किसी परेशानी के फिल्म शतरंज के खिलाड़ी पूरी हुई।

अन्य समाचार