मुख्यपृष्ठस्तंभभारतीयों के ग्रीन कार्ड का टूटा सपना

भारतीयों के ग्रीन कार्ड का टूटा सपना

-ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति का झटका

अरुण कुमार गुप्ता

अमेरिका में ग्रीन कार्ड का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए ट्रंप प्रशासन ने बड़ा झटका दे दिया है। अब सिर्फ ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन भरने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ग्रीन कार्ड चाहिए तो पहले अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए एलान किया कि अब अमेरिका में रह रहे गैर-नागरिक देश के भीतर रहकर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। उन्हें अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास के जरिए आवेदन करना होगा और वहीं इंतजार करना होगा। अब तक अमेरिका में रह रहे कई लोग, जिनमें अमेरिकी नागरिकों के पति-पत्नी, उनके बच्चे, स्टूडेंट वीजा या टेंपरेरी वर्क वीजा पर आए लोग शामिल थे, एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस के जरिए अमेरिका के भीतर रहकर ही ग्रीन कार्ड हासिल कर सकते थे, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस रास्ते पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है।
१२ लाख ग्रीन कार्ड के
एप्लीकेशन पेंडिंग
ळएण्घ्ए के प्रवक्ता जैक कहलर ने कहा कि अमेरिका अब ‘कानून की मूल भावना’ पर लौट रहा है। उनके मुताबिक, जो लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका आते हैं, उनकी यात्रा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया की पहली सीढ़ी नहीं होनी चाहिए। अगर उन्हें स्थायी निवास चाहिए, तो उन्हें अपने देश लौटकर वहीं से आवेदन करना होगा। इस पैâसले का असर छोटा नहीं है। केटो इंस्टीट्यूट के मुताबिक, करीब १२ लाख लीगल इमिग्रेंट्स ऐसे हैं, जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन पेंडिंग हैं और वे इस नए नियम की चपेट में आ सकते हैं। उन्हें अपने देश लौटना पड़ा सकता है। सिर्फ २०२४ में ही ७.८२ लाख से ज्यादा लोगों ने अमेरिका के भीतर रहकर एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल किया था। अब यह रास्ता लगभग बंद हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप की
सरकार क्या कह रही?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे इमिग्रेशन सिस्टम ज्यादा ‘निष्पक्ष और कुशल’ होगा। प्रशासन का तर्क है कि कई लोग टूरिस्ट, स्टूडेंट या अस्थायी वीजा लेकर अमेरिका आते हैं और फिर उसी को ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बना लेते हैं। अब सरकार इस लूपहोल को बंद करना चाहती है। लेकिन विरोधी इसे ट्रंप का लीगल इमिग्रेंट्स पर बड़ा वार बता रहे हैं। डेमोक्रेट सांसद जेम्स वॉकिनशॉ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने लाखों लीगल इमिग्रेंट्स से कह दिया है कि ‘अमेरिका छोड़ो और फिर से शुरुआत करो।’ वहीं सांसद टेड लियू ने चेतावनी दी कि इस फैसले से अमेरिका के वैज्ञानिक, रिसर्चर, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और स्किल्ड प्रोफेशनल दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं, जिसका फायदा चीन और रूस जैसे देशों को मिल सकता है।

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