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अंकल सैम के जाल में फंसा हिंदुस्थान … अब सारा तेल ट्रंप से खरीदो!

होर्मुज को ब्लॉक करके तेल बेचने पहुंचे रुबियो
ईरान, वेनेजुएला, रूस पर पहले से ही है पाबंदी
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
क्रूड ऑयल के मामले में अमेरिका ने हिंदुस्थान को पूरी तरह से अपने जाल में फंसा लिया है। चीन के बाद हिंदुस्थान कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। ईरान, वेनेजुएला, रूस के बाद होर्मुज ब्लॉक करके अमेरिका ने हिंदुस्थान को तेल के लिए मोहताज कर दिया है। सरकार को रोज पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ाने पड़ रहे हैं। अब अमेरिकी बिदेश मंत्री मार्को रुबियो हिंदुस्थान आकर कह रहे हैं कि हिंदुस्थान को जितना भी तेल चाहिए, अमेरिका उसे देने के लिए तैयार है।
बता दें कि कल रुबियो ने राजधानी में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बताया जाता है कि इस बातचीत में रुबियो ने मोदी से बार-बार अमेरिकी तेल खरीदने का आग्रह किया।
इससे पहले अमेरिका से रवाना होने के पूर्व भी रुबियो ने वहां कहा था कि अमेरिका, हिंदुस्थान के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रहा है।

रुबियो का तीन दिवसीय दौरा
रुबियो २३ से २६ मई तक तीन दिवसीय हिंदुस्थान के दौरे पर हैं। कल वे कोलकाता और नई दिल्ली में थे। इसके बाद वे आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे। हालांकि, रुबियो क्वॉड गुट के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने नई दिल्ली आए हैं। मगर वे यहां असल में तेल का खेल खेलने आए हैं। क्वॉड में अमेरिका, जापान, हिंदुस्थान और ऑस्ट्रेलिया हैं।

अमेरिका में दे दिए थे संकेत
रुबियो ने अमेरिका से रवाना होने से पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे। उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा उनकी नई दिल्ली यात्रा के दौरान चर्चा का अहम हिस्सा होगा। वहां पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा था, ‘हिंदुस्थान हमसे जितना तेल खरीदना चाहता है, उतना हम देने के लिए तैयार हैं। अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर तेल उत्पादन और निर्यात कर रहा है।’ ऐसा कहकर अमेरिका ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे।

अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदे  हिंदुस्थान!
अमेरिकी विदेश मंत्री का दबाव

ईरान पर लाखों बम गोले बरसाने के बाद अमेरिका ने अब अपना असली रंग दिखा दिया है। वह तेल बेचने निकल पड़ा है और उसकी नजर सबसे बड़े खरीददार हिंदुस्थान पर है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस वक्त दिल्ली में मोदी सरकार को अमेरिकी तेल खरीदने के लिए कह रहे हैं। अमेरिका काफी पहले से इसकी तैयारी कर रहा था।
अमेरिका से तेल आयात को लेकर रुबियो ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी ऊर्जा हिंदुस्थान के ऊर्जा पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा बने। हमें यह भी लगता है कि वेनेज़ुएला के तेल को लेकर भी अवसर मौजूद हैं। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते हिंदुस्थान आने वाली हैं। वेनेजुएला और हिंदुस्थान के पास आपस में काम करने के कई अवसर मौजूद हैं।’
रुबियो की इस टिप्पणी पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ‘अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बार फिर सबसे पहले यह घोषणा कर दी कि वेनेज़ुएला की राष्ट्रपति अगले सप्ताह हिंदुस्थान आने वाली हैं। दिलचस्प बात यह है कि हिंदुस्थान और वेनेजुएला दोनों में से किसी ने भी इस यात्रा का संकेत या आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
विशेषज्ञों का कहना है
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, ‘अमेरिका दुनिया भर में तेल की आपूर्ति पर अपना नियंत्रण चाहता है और इसकी शुरुआत उसने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो का तख्तालट कर की थी। प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी ने कहा, ‘अमेरिका तेल के कारोबार पर अपना वर्चस्व चाहता है। इसका पैटर्न हमें साफ दिख रहा है। पहले रूस से तेल आयात पर सख्ती, वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और फिर ईरान पर हमला।

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