भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ प्रेसिडेंट ट्रंप ने की है, ऐसी जोरदार चर्चा भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने शुरू कर दी है। यह एक अपराधी द्वारा दूसरे अपराधी को चरित्र प्रमाण पत्र देने जैसा ही मामला है। इस वक्त दुनिया में अगर कोई सबसे `बिकाऊ’ और दोषपूर्ण चुनाव व्यवस्था है, तो वह भारत की है। महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से २ करोड़ ७ लाख मतदाताओं को अयोग्य ठहराने का `महान’ काम चुनाव आयोग अंतिम चरण में ले आया है। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जटिल और भ्रम पैदा करने वाली है। जिस राज्य में स्कूलों के हेडमास्टर शराब पीकर पड़े रहते हैं, बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए सड़कें नहीं हैं, आश्रमशालाओं की लड़कियां सांप के काटने से मर जाती हैं और गरीबों को अपने जरूरी काम करवाने के लिए हर कदम पर रिश्वत देनी पड़ती है, उस राज्य का पिसा हुआ मतदाता, मतदाता पुनरीक्षण की इस लड़ाई में कहां टिक पाएगा? पश्चिम बंगाल में ऐन विधानसभा चुनावों के वक्त ८० लाख मतदाताओं को बाहर कर दिया गया और उसी के दम पर बीजेपी सत्ता में आई। बिहार में भी यही खेल खेला गया। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के दौरान अचानक ४२ लाख मतदाता बढ़ाकर चमत्कार कर दिया गया। ये ४२ लाख मतदाता आए कहां से? उनका अता-पता क्या है, इसका खुलासा महाराष्ट्र का चुनाव आयोग नहीं कर सका। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची के घोटाले का सच बयां किया है। मतदाताओं के नाम हटाना, दोहरे मतदाताओं को संरक्षण देना और उनके नाम पर शाम को
बोगस मतदान
करवा लेना, ऐसे काम तब चुनावों के दौरान अंजाम दिए गए। इसे कोई आदर्श चुनाव प्रणाली नहीं कहेगा। अब फिर राज्य के दो करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का वजूद खतरे में आ गया है। इस पर आयोग का कहना है कि ७५.५२ लाख मतदाताओं ने सूची में नाम दर्ज कराने में अनास्था दिखाई। १७ लाख मतदाताओं के नाम दोहरे होने के कारण हटा दिए गए। अब एक स्वच्छ, पवित्र मतदाता सूची प्रकाशित होगी। २०२४ के लोकसभा चुनाव में लाखों दोहरे मतदाताओं ने अलग-अलग जगहों पर वोट डाला। उसके सबूत देने के बावजूद चुनाव आयोग या अदालत ने कोई संज्ञान नहीं लिया। ठाणे लोकसभा सीट से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) उम्मीदवार राजन विचारे ने लाखों दोहरे और फर्जी मतदाताओं के सबूत चुनाव आयोग और अदालत को दिए, लेकिन यह सब दीवार पर सिर पटकने जैसा ही साबित हुआ। `एसआईआर’ का काम करने के लिए राज्य के एक लाख बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मैदान में उतरे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री चोकलिंगम कहते हैं, `सभी बीएलओ द्वारा किया गया काम काबिलेतारीफ है। हर बीएलओ ने अपने क्षेत्र के घरों में तीन-तीन बार दौरे किए। उन्होंने बहुत मेहनत की।’ यह सब ठीक है, लेकिन मुख्य सवाल चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का है। चुनाव आयोग क्या वास्तव में निष्पक्ष रहा है? यह असली सवाल है। महाराष्ट्र में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी चोकलिंगम पर है, लेकिन देश का मुख्य चुनाव आयोग आदर्श और निष्पक्ष नहीं रहा है। वह
भाजपा का एजेंट
और अमित शाह का कारिंदा बन चुका है। पश्चिम बंगाल और बिहार के विधानसभा चुनावों में की गई उनकी धांधली उजागर हो चुकी है। इसलिए महाराष्ट्र में `एसआईआर’ के इस खेल में सभी विपक्षी दलों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। महाराष्ट्र में दो करोड़ मतदाताओं के नाम अब हटा दिए गए हैं। इनमें लगभग ३५ लाख मृत मतदाता हैं। पश्चिम बंगाल में हजारों मतदाताओं को जिंदा रहते हुए मृत दिखाकर उन्हें मतदान से वंचित रखा गया। बिहार में एक खास धर्म के हजारों मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया और आदेश दिया गया कि अगर आप चार पीढ़ियों के दस्तावेज लाएंगे, तभी आपको मतदाता माना जाएगा, यह हुक्म दिल्ली के चुनावी तुगलकों ने जारी किया। चुनाव जीतने के लिए बीजेपी नए-नए हथकंडे खोजती रहती है। वे कई बार विपक्ष के ध्यान में ही नहीं आते। इस बार बड़े पैमाने पर `जेन जी’ मतदाताओं के बाहर होने का डर है, क्योंकि इस बड़े नए मतदाता वर्ग ने मोदी-शाह-फडणवीस के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इसलिए उनका मताधिकार छीनने की कोशिश यकीनन होगी। इसे नाकाम करना ही होगा। पुणे, नागपुर, नासिक, मुंबई, रायगढ़ और छत्रपति संभाजीनगर के युवाओं ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किए हैं। लिहाजा, इन शहरों के युवा वर्ग को ज्यादा सतर्क रहना पड़ेगा। मतदाता सूची में भ्रष्टाचार और धांधली ही बीजेपी का नया हथियार है। इस हथियार को अब कुंद करना होगा। प्रेसिडेंट ट्रंप को अगर भारत की चुनाव प्रणाली आदर्श और पारदर्शी लगती है, तो वे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनकी पूरी मशीनरी के साथ अमेरिका ले जाएं और वहां चुनाव करवाएं। वे प्रेसिडेंट ट्रंप को जैसी चाहिए वैसी वोटिंग कराकर दिखा देंगे और भारत के महान लोकतंत्र की तरह अमेरिका के लोकतंत्र का भी जनाजा निकाल देंगे, इसमें हमें कोई शक नहीं है।
