सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश की सियासत में इन दिनों एक ऐसे जीव की एंट्री हुई है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा ‘हिट’ मारकर भगाने की कोशिशें जितनी तेज हो रही हैं, उसकी रील्स और यूआरएल उतने ही गुणात्मक रूप से बढ़ते जा रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोशल मीडिया पर धूम मचाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की। आलम यह है कि सरकारी तंत्र जहां ‘डाल-डाल’ चलकर इनके डोमेन और सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक के बद एक ताले लगा रहा है, वहीं डिजिटल दुनिया के ये स्वघोषित ‘कॉकरोच’ ‘पात-पात’ दौड़ते हुए नई वेबसाइट के साथ हाजिर हो जा रहे हैं।
चंद घंटे में फिर निकल आया कॉकरोच
हाल ही में जब केंद्रीय एजेंसियों के कथित दबाव में इस व्यंग्यात्मक आंदोलन की आधिकारिक वेबसाइट को ब्लॉक किया गया तो आईटी सेल के अधिकारियों ने शायद राहत की सांस ली होगी। लेकिन यह राहत चंद घंटों की भी नहीं थी। जैसे रसोई के किसी कोने से एक कॉकरोच हटते ही दूसरा निकल आता है, ठीक वैसे ही ‘कॉकरोचजनतापार्टी.ऑर्ग’ के बंद होते ही एक और नया डिजिटल ठिकाना लाइव हो गया। ये है ‘कॉकरोचजनतापार्टी.प्रो’।
‘वे हमें कुचलने की कोशिश करते रहे
लेकिन हम फिर वापस आ गए!’
सीजेपी का सोशल मीडिया पर वायरल नारा
कुछ ही दिनों पहले देश के एक शीर्ष पद से युवाओं के लिए निकले ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों को ढाल बनाकर शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार के लिए सिरदर्द बन चुका है। इंस्टाग्राम पर महज ५ दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी ने २ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स बटोर कर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों को ‘दौड़ा’ दिया है। सरकार इस ‘कॉकरोच’ पर डिजिटल पेस्ट कंट्रोल कर रही है, पर कॉकरोच इसका तोड़ ढ़ूंढ ले रहे हैं।
अब हालत यह है कि एजेंसियां तकनीकी और कानूनी ‘घात-पात’ में जुटी हैं, और वहां एआई की मदद से महज एक घंटे में नई वेबसाइट खड़ी कर दी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह लड़ाई अब किसी एक वेबसाइट या सोशल मीडिया एकाउंट की नहीं, बल्कि ‘बेरोजगार और आलसी’ होने का टैग झेल रहे युवाओं के उस गुस्से की है, जो डिजिटल दुनिया के इस चूहे-बिल्ली के खेल का भरपूर लुत्फ उठा रहा है।
