मुख्यपृष्ठस्तंभईरान-अमेरिका समझौते की आहट... युद्ध के बाद कूटनीति की तेज भागदौड़

ईरान-अमेरिका समझौते की आहट… युद्ध के बाद कूटनीति की तेज भागदौड़

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग के बीच अब कूटनीति की सबसे बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसे समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है, जिसके तहत ६० दिनों के युद्धविराम विस्तार, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, ईरान को तेल बिक्री की छूट और परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के हवाले से रॉयटर्स ने बताया है कि प्रस्तावित समझौते में ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करने या उस पर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है, हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर औपचारिक टिप्पणी नहीं की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ शांति समझौता ‘काफी हद तक तय’ हो चुका है और इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बन रही है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस बातचीत में इजरायल, सऊदी अरब और पाकिस्तान सहित कई पक्षों से संपर्क की बात कही है। हालांकि, ईरानी पक्ष की ओर से संकेत मिले हैं कि अभी सभी शर्तों पर अंतिम सहमति नहीं बनी है।
सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। येरुशलम पोस्ट ने न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से लिखा कि ईरान संवर्धित यूरेनियम छोड़ने पर सहमत हो सकता है, लेकिन ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि परमाणु मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय स्वीकार नहीं किया गया है। यानी समझौते की मेज पर सहमति का माहौल जरूर है, लेकिन अंतिम दस्तावेज अभी भी कूटनीतिक रस्साकशी में फंसा है।
इस बीच पाकिस्तान की भूमिका ने पूरे घटनाक्रम को और रोचक बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी नेतृत्व और सेना प्रमुख आसिम मुनीर वार्ता की मध्यस्थता में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। द गार्जियन ने भी पाकिस्तान की भूमिका को इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया है, जबकि कतर और मिस्र जैसे क्षेत्रीय खिलाड़ी भी तनाव कम कराने की कोशिशों में लगे हैं।
इस समझौते की जरूरत केवल कूटनीतिक नहीं, सामरिक भी है। ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की रक्षा में भारी मात्रा में आधुनिक मिसाइल-रोधी हथियार इस्तेमाल किए। वाईनेट ने वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि इस युद्ध में अमेरिका के उच्च तकनीक वाले इंटरसेप्टर भंडार पर गंभीर दबाव पड़ा है। इससे पेंटागन की चिंता बढ़ी है कि यदि टकराव लंबा खिंचा तो अमेरिका की अपनी रक्षा तैयारी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल तस्वीर यह है कि ट्रंप हमला टालकर समझौते की राह पर बढ़ना चाहते हैं, लेकिन दबाव की भाषा भी बनाए हुए हैं। ईरान राहत, तेल बिक्री और बंदरगाहों पर लगी रोक हटाने की शर्तों को अहम मान रहा है। यदि अगले कुछ दिनों में मसौदे पर अंतिम मुहर लगती है तो यह पश्चिम एशिया में युद्ध से कूटनीति की ओर बड़ा मोड़ होगा। लेकिन यदि यूरेनियम, प्रतिबंध और होर्मुज पर बात अटकती है तो क्षेत्र फिर सैन्य टकराव के मुहाने पर लौट सकता है।

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