सामना संवाददाता / मुंबई
भारत में डायबिटीज के बढ़ते संकट के बीच दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड ने इलाज की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए ओरल सेमाग्लूटाइड बायोसिमिलर टैबलेट ‘ओबेडा®’ लॉन्च कर दी है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए पेश की गई यह नई दवा भारत में टैबलेट स्वरूप में उपलब्ध होगी और इसे डायबिटीज प्रबंधन के क्षेत्र में गेमचेंजर माना जा रहा है। कंपनी ने हाल ही में भारत और कनाडा में जेनेरिक सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन भी लॉन्च किए थे। अब ‘ओबेडा®’ के आगमन के साथ जीएलपी-1 थेेरेपी सेगमेंट में डॉ. रेड्डीज ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजेक्शन आधारित उपचार की तुलना में टैबलेट विकल्प मरीजों के लिए अधिक सुविधाजनक साबित हो सकता है। आईसीएमआर-इंडियाब अध्ययन के मुताबिक भारत दुनिया में डायबिटीज के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल हो चुका है। देश में 10 करोड़ से अधिक वयस्क टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि करीब 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटिक श्रेणी में हैं। इसके अलावा लगभग 40 प्रतिशत वयस्क पेट के मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं, जो भविष्य में गंभीर डायबिटीज जोखिम का संकेत माना जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज आज भी देश के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। ऐसे में ओरल सेमाग्लूटाइड जैसी आधुनिक दवाएं मरीजों को शुरुआती चरण में ही बेहतर उपचार उपलब्ध करा सकती हैं। यह दवा ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट यानी GLP-1 RA श्रेणी की है, जो ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करती है। इसे आहार और व्यायाम के साथ सहायक उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि टैबलेट के रूप में उपलब्ध यह दवा मरीजों के लिए अधिक लचीला और आसान विकल्प बन सकती है। इससे मरीजों में दवा नियमित रूप से लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और लंबे समय में डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार इसे भारत में डायबिटीज उपचार के नए दौर की शुरुआत मान रहे हैं, जहां आधुनिक तकनीक, आसान उपचार और व्यापक पहुंच के जरिए करोड़ों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
