मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: ट्रंप का नया फरमान धर्मसंकट में मुस्लिम देश!

मुस्लिम वर्ल्ड: ट्रंप का नया फरमान धर्मसंकट में मुस्लिम देश!

सूफी खान

कई एक्सपर्ट दावा करते हैं कि मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका के लिए सब कुछ है। हालात ये हैं कि इजरायल को बचाने के लिए अमेरिका किसी भी हद तक जा सकता है।
अब एक बार फिर अमेरिका, इजरायल की तरफ से खेल रहा है। इस बार अरब और मुस्लिम देशों के साथ। दरअसल, ट्रंप ने सऊदी, कतर, पाकिस्तान, तुर्की सब को साफ कह दिया है कि वो इजरायल को स्वीकार करें। उसके साथ समझौते में बंध जाएं। मुस्लिम देशों के सामने ये एक बड़ा धर्मसंकट है।
दरअसल, हाल ही में ट्रंप ने ईरान से डील को लेकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के लीडर्स के साथ फोन पर बात की। जिसमें ट्रंप ने ये कहकर अरब और मुस्लिम देशों के पसीने छुड़वा दिए कि ईरान से जंग खत्म होने के बाद अगला कदम होगा कि अरब और मुस्लिम देश इजरायल से समझौता सामान्य करें और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हों।
ट्रंप ने नेताओं से कहा कि वो इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को भी फोन करेंगे और इजरायल और बाकी मुस्लिम देश भी फोन पर एक साथ बात करेंगे। ये सुनकर अरब और मुस्लिम देशों के लीडर्स को तो सांप सूंघ गया। फोन के दौरान सन्नाटा छा गया।
खासकर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के नेता, जिनके इजरायल के साथ औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं। पाकिस्तान में तो एंटी इजरायल राजनीति ही चलती है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान के पासपोर्ट पर लिखा है कि पाकिस्तान-इजरायल को मान्यता नहीं देता। एक अधिकारी ने बताया, फोन लाइन पर कुछ देर खामोशी छा गई। तब ट्रंप ने मजाक में पूछा कि क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं? तब जाकर मुस्लिम देश कुछ सहज हुए।
गौरतलब है कि सऊदी, कतर और कई दूसरे अरब और मुस्लिम बहुल देश इजरायल को मान्यता नहीं देते और फिलिस्तीन की टू स्टेट पॉलिसी के समर्थक हैं। सऊदी कहता रहा है कि जब तक इजरायल फिलिस्तीन को लेकर कोई गारंटी नहीं देता तब तक वो उससे संबंध सामान्य नहीं करेगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी अंदर से तो चाहता है कि इजरायल से दोस्ती कर ली जाए, लेकिन दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को देखकर पीछे हट जाता है। जबकि यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात ने साल २०२० में ट्रंप की पहल पर इजरायल से इब्राहिम समझौता कर लिया था, जॉर्डन भी इसमें शामिल है। पाकिस्तान, तुर्की को अवाम की बगावत का डर लगता है। अब ट्रंप पीछे पड़े हैं कि बाकी अरब और मुस्लिम देश भी इजरायल को मान्यता दे दें। एक्सपर्ट कहते हैं कि इसके पीछे वजह ये हो सकती है कि पीएम नेतन्याहू चाहते हों कि ईरान से अमेरिका की डील के बाद उनके देश को भी तो कुछ मिले। हो सकता है ट्रंप ने भरोसा दिया हो कि ईरान से डील के बदले वो अरब और मुस्लिम देशों के साथ इजरायल का इब्राहिम समझौता करवा देंगे। कहा जाता है कि इजरायल अब भी जंग रोकने के खिलाफ है। पीएम नेतन्याहू नहीं चाहते कि अमेरिका ईरान के साथ कोई समझौता को अंजाम दे। यही वजह है कि इजरायल को मनाने अब ट्रंप अरब और मुस्लिम देशों पर इजरायल से समझौते का दबाव बना रहे हों।

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