मनमोहन सिंह
हेडिंग देखकर ही दिल ‘गार्डन – गार्डन’ हो गया न? मतबल बाग बाग! तो बॉस, बात ऐसी है कि हमारी ‘दंगल गर्ल’ विनेश फोगाट ने कोर्ट के अखाड़े में डब्ल्यूएफआई को ऐसा धोबी पछाड़ मारा है कि डब्ल्यूएफआई यानी भारतीय कुश्ती महासंघ चारों खाने चित हो गया है। दिल्ली हाई कोर्ट से हरी झंडी क्या मिली, डब्ल्यूएफआई ने भी ‘यू-टर्न’ मारते हुए कह दिया है, ‘हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, विनेश को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाएगा।’ यानी, नो पंगा, सीधे सरेंडर! तो भैया अब जरा पूरी कहानी का मजा लीजिए।
डबल्यूएफआई मैडम के मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) को मुद्दा बनाकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने पर तुला था। लेकिन हाई कोर्ट ने फेडरेशन को ऐसा ‘लीगल सुप्लेक्स’ मारा कि उनकी बोलती बंद हो गई। चीफ जस्टिस की बेंच ने साफ-साफ कहा, ‘मातृत्व कोई गुनाह नहीं, जीवन का खूबसूरत सच है। इसके आधार पर किसी महिला खिलाड़ी के करियर को हाशिए पर नहीं धकेला जा सकता। फेडरेशन को थोड़ी संवेदनशीलता सीखनी चाहिए।’
यही नहीं, पेरिस ओलंपिक में वजन के चक्कर में जो हुआ, उसे फेडरेशन ने ‘राष्ट्रीय शर्मिंदगी’ कह दिया था। इस पर कोर्ट ने लताड़ लगाते हुए कहा कि फेडरेशन की यह भाषा ‘निंदनीय और बदले की भावना’ से भरी है।
ट्रायल्स ३० और ३१ मई को नई दिल्ली में होने हैं। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि पूरी कुश्ती की वीडियोग्राफी होगी और एसएआई यानी भारतीय खेल प्राधिकरण व आईओए का मतलब भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारी वहां चील जैसी नजरें गड़ाकर बैठेंगे। कोई धांधली नहीं चलेगी!
हालांकि, डब्ल्यूएफआई ने अब नया रोना रोया है कि खिलाड़ियों की लिस्ट तो पहले ही जापान भेजी जा चुकी है। लेकिन साथ ही दबी जुबान में यह भी मान लिया कि अगर विनेश ट्रायल्स जीतती हैं, तो उन्हें ‘आइकॉनिक खिलाड़ी’ के तौर पर ५० किलोग्राम वर्ग में टीम में शामिल किया जा सकता है।
लब्बोलुआब यही है कि सिस्टम चाहे जितने अड़ंगे लगा ले, जब हौसला विनेश फोगाट जैसा हो, तो कानून भी साथ देता है और हक भी मिलता है। ऑल द बेस्ट, विनेश! खेल के मैदान पर एक और ‘दंगल’ देखने के लिए देश तैयार है।
