मुख्यपृष्ठस्तंभट्रंप के चक्रव्यूह में फंसा पाकिस्तान...एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई

ट्रंप के चक्रव्यूह में फंसा पाकिस्तान…एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई

उमन गुप्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इजरायल को मान्यता देने की मांग के बाद पाकिस्तान के सामने एक ऐसी दुविधा खड़ी हो गई है, जिसमें अगर वह मानता है तो भी फंसेगा और अगर इनकार करता है तो और ज्यादा मुश्किल में पड़ जाएगा। दरअसल, ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई देशों के साथ एक उच्च स्तरीय कॉन्प्रâेंस कॉल की। ट्रंप ने अधिक से अधिक मुस्लिम देशों से अपील की कि वे ईरान युद्ध के बाद अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ें, जिसका सीधा मतलब इजरायल को औपचारिक मान्यता देना है। ट्रंप के प्रस्ताव के बाद कॉल में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया। इसके बाद ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में पाकिस्तान समेत अन्य देशों से पूछा कि क्या वे अभी भी लाइन पर हैं। दरअसल, पाकिस्तान की मुश्किल यह है कि वह एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप के इस प्रस्ताव ने उसे असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।
पाकिस्तान ने आज तक इजरायल को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान की स्थापना ‘मुस्लिम पहचान’ और फिलिस्तीन समर्थन की राजनीति से जुड़ी रही है। इसलिए अगर पाकिस्तान कभी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होता है, तो उसके कई बड़े मायने होंगे। अब्राहम अकॉर्ड में पाकिस्तान के शामिल होने का मतलब है `फिलिस्तीन काउज’ की तिलांजलि। ये इतना नाजुक मसला है कि पाकिस्तान में विद्रोह की आग भड़क सकती है। पाकिस्तान के शामिल होने का मतलब होगा कि वह पहली बार इजरायल को मान्यता देगा। इससे उसकी पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक नीति बदलती दिखेगी और घरेलू राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
भड़क सकता है आंतरिक विद्रोह
इजरायल को मान्यता देने का मतलब है कि पाकिस्तान अपनी फिलिस्तीन नीति को लेकर नरम होगा, लेकिन उसका ये कदम उसके `इस्लामिक पहचान’ से सीधा टकराएगा। पाकिस्तान की धार्मिक तंजीमें इजरायल से जबर्दस्त नफरत करती हैं. ऐसी कोई भी कोशिश पाकिस्तान में हिंसा और विद्रोह को जन्म दे सकती है।
मान्यता दे तो बवाल, न दे तो दबाव
अब पाकिस्तान को तय करना पड़ेगा कि वो ट्रंप की बात मानें अथवा इजरायल को मान्यता देकर आंतरिक अशांति के चक्रव्यूह में फंस जाए। अब पाकिस्तान के सामने एक ऐसी दुविधा खड़ी हो गई है, जिसमें अगर वह मानता है तो भी फंसेगा और अगर इनकार करता है तो और ज्यादा मुश्किल में पड़ जाएगा।

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