एड. कनई बिस्वास
धारा ७३, ७४ और ७५
भाग:२५
कानून केवल महिलाओं को शारीरिक हिंसा से ही नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, डर और निजता के उल्लंघन से भी सुरक्षा देता है। किसी महिला का लगातार पीछा करना, उसकी निजी जिंदगी में दखल देना या अपमानजनक व्यवहार करना गंभीर अपराध माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), २०२३ की धारा ७३, ७४ और ७५ ऐसे ही अपराधों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी-१: ‘पीछा करना’ (धारा ७३)
एक व्यक्ति लगातार एक महिला का पीछा करता था, उसके कार्यालय और घर के बाहर घंटों खड़ा रहता था और बार-बार संपर्क करने की कोशिश करता था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी लगातार पीछा कर रहा था?
क्या महिला ने स्पष्ट रूप से विरोध किया था?
क्या आरोपी का व्यवहार महिला में डर या असुरक्षा पैदा कर रहा था?
फैसला- यह पीछा करने का मामला है। समझें: धारा ७३ के तहत किसी महिला का लगातार पीछा करना या उसकी इच्छा के विरुद्ध संपर्क करने की कोशिश करना, अपराध माना जाता है।
केस स्टडी – २: ‘निजता का उल्लंघन’ (धारा ७४)
एक व्यक्ति ने महिला की निजी तस्वीरें उसकी अनुमति के बिना इंटरनेट पर साझा कर दीं।
अदालत क्या देखेगी?
क्या तस्वीरें निजी थीं?
क्या महिला की अनुमति नहीं ली गई?
क्या इससे उसकी प्रतिष्ठा और निजता प्रभावित हुई?
पैâसला- यह महिला की निजता का उल्लंघन करने का मामला है। समझें: धारा ७४ के अनुसार किसी महिला की निजी जानकारी, फोटो या वीडियो का दुरुपयोग अपराध माना जाता है।
केस स्टडी- ३: ‘अपमानजनक और अशोभनीय व्यवहार’ (धारा ७५)
एक व्यक्ति ने सार्वजनिक स्थान पर महिला के साथ अभद्र भाषा और अश्लील हरकतें कीं।
अदालत क्या देखेगी?
क्या व्यवहार महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला था?
क्या आरोपी ने जानबूझकर ऐसा किया?
क्या पीड़िता को मानसिक अपमान या डर महसूस हुआ?
पैâसला- यह महिला की गरिमा का अपमान करने का मामला है। समझें: धारा ७५ के तहत महिला के सम्मान और मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार अपराध माना जाता है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। उनकी गरिमा, निजता और मानसिक स्वतंत्रता की रक्षा करना भी कानून की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यानी किसी महिला को डर, अपमान या असुरक्षा महसूस कराने वाला व्यवहार भी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है।
(अगले अंक में: धारा ७६, ७७ और ७८ – ‘विवाह, क्रूरता और महिला उत्पीड़न से जुड़े अपराध’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
