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जनता की आवाज दबा रही केंद्र सरकार!..सरकार के कड़े रवैय्ये पर भड़का एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने मीडिया के सवालों को लेकर सरकार के बढ़ते अड़ियल और सख्त रुख पर गहरी चिंता जताई है। यह मामला तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे और नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारतीय अफसरों और वहां के पत्रकारों के बीच बहस हो गई। गिल्ड ने इन घटनाओं को `शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि इससे भारत में प्रेस की आजादी और सरकार की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठते हैं।
यह पूरा विवाद नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लेंग के सोशल मीडिया `एक्स’ पोस्ट के बाद शुरू हुआ। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने प्रेस ब्रीफिंग के बाद स्थानीय पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं दिए। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने `सांस्कृतिक अंतर’ का बहाना बनाया। गिल्ड ने इस पर जवाब दिया कि भले ही विदेशी पत्रकारों को भारत के इतिहास की पूरी समझ न हो, लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने का उनका हक बिल्कुल सही है। संस्था ने इस बात पर दुख जताया कि प्रधानमंत्री ने अपने १० साल से ज्यादा के कार्यकाल में एक भी खुली प्रेस कॉन्प्रâेंस नहीं की है। गिल्ड के मुताबिक, सवाल पूछे जाने पर चिढ़ने की यह आदत सिर्फ केंद्र सरकार में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों की सरकारों में भी बढ़ती जा रही है। मीडिया पर ऐसी पाबंदियां हमारे समाज, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती हैं।
`दुनिया में प्रेस की आजादी की रैंकिंग’ का हवाला देते हुए गिल्ड ने कहा कि जहां नॉर्वे और नीदरलैंड इस लिस्ट में पहले और दूसरे नंबर पर हैं, वहीं १८० देशों में भारत १५७वें पायदान पर है। भले ही इस रैंकिंग के तौर-तरीकों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भारत का इतना नीचे होना बेहद चिंता की बात है। अंत में, गिल्ड ने सरकार से अपील की है कि वह जनता की तरफ से सवाल पूछने वाले मीडिया को अपना दुश्मन समझना बंद करे।

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