-नियमों को ताक पर रखकर लगाए जा रहे एलईडी होर्डिंग्स
-बांद्रा-खेरवाड़ी पैदल पुलों पर लगे एलईडी होर्डिंग्स ने सुरक्षा पर खड़े किए सवाल
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई के बांद्रा-ईस्ट में बीकेसी कलानगर जंक्शन और खेरवाड़ी के पास पैदल पार पुलों पर लगे दो विशाल एलईडी होर्डिंग्स ने जनता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस संबंध में लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं, क्योंकि मुंबई में घाटकोपर होर्डिंग हादसे जैसी त्रासदियों के बाद भी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर भारी-भरकम विज्ञापन लगाने का सिलसिला नहीं थमा है। आरटीआई एक्टिविस्ट भावेश कालिया द्वारा आरोप लगाया गया है कि इन होर्डिंग्स से जुड़े जरूरी दस्तावेज जैसे कि स्ट्रक्चरल सेफ्टी रिपोर्ट, स्थिरता प्रमाण पत्र, मंजूरी के रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे इन होर्डिंग्स की सुरक्षा और वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरक्षा और मंजूरी से जुड़े सभी दस्तावेज अभी तक सार्वजनिक नहीं किए जाने के कारण, उन हजारों यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, जो हर दिन इन पैदल पुलों का इस्तेमाल करते हैं या उनके नीचे से अपने वाहन लेकर गुजरते हैं।
ट्रैफिक विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि पुलों पर लगे बड़े एलईडी बिलबोर्ड ड्राइवरों का ध्यान भटका सकते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका है। इस बीच, इन होर्डिंग्स के टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की भी चर्चाएं हो रही हैं।
पैदल चलने वाले पुलों का निर्माण मुख्य रूप से नागरिकों के आने-जाने के लिए किया जाता है। इन पर विशालकाय लोहे के प्रâेम और भारी एलईडी स्क्रीन लगाने से पुल के ढांचे पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे संरचनात्मक विफलता का खतरा पैदा होता है। मानसून के दौरान मुंबई में चलने वाली तेज हवाओं और तूफानों के समय ये बड़े होर्डिंग्स ‘सेल’ की तरह काम करते हैं, जिससे पुल के गिरने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर खेरवाड़ी जंक्शन एक अत्यधिक व्यस्तम मार्ग है।
