जेदवी / मुंबई
मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल एमएच-सीईटी २०२५-२६ अब बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। परीक्षा परिणाम घोषित होते ही ऐसे कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बोर्ड परीक्षाओं में बेहद कम अंक पाने वाले कई छात्र एमएच-सीईटी में ९९.९ से लेकर १०० पर्सेंटाइल तक हासिल कर ‘टॉपर’ बन गए।
जानकारी के अनुसार करीब २२ छात्रों के मामले चर्चा में हैं, जिनके १०वीं और १२वीं बोर्ड परीक्षा में केवल ३५ से ४० प्रतिशत अंक थे, लेकिन सीईटी में उन्होंने असाधारण प्रदर्शन दिखाया। एक छात्र, जिसे १०वीं में मात्र ३७ प्रतिशत अंक मिले थे, उसे एमएच-सीईटी में ९९.९७१ पर्सेंटाइल प्राप्त हुआ। वहीं कुछ छात्रों को १२वीं में ३५, ३९ और ४५ प्रतिशत अंक होने के बावजूद १०० पर्सेंटाइल मिलने का दावा किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा हैरानी उस छात्र को लेकर जताई जा रही है, जिसे सीईटी गणित में १०० पर्सेंटाइल मिला, जबकि एचएससी पीसीएम में उसके कुल अंक केवल ३९ प्रतिशत थे। टॉप-२० में शामिल कई छात्रों के बोर्ड और सीईटी अंकों के बीच भारी अंतर ने विद्यार्थियों और पालकों की चिंता बढ़ा दी है।
इस विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सेलने सभी आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है। दूसरी ओर छात्र और अभिभावक इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
