सामना संवाददाता / नई मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र में इस साल मई महीने में सब्जियों की आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले साल की तुलना में इस बार सब्जियों के दाम ३० से ५० प्रतिशत तक अधिक हैं। आमतौर पर गर्मियों में बढ़ने वाली कीमतें कुछ समय बाद स्थिर हो जाती हैं, लेकिन इस बार भीषण गर्मी और ट्रांसपोर्टेशन लागत ने बाजार का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। वाशी स्थित एपीएमसी (कृषि उपज मंडी समिति) के अनुसार, बाजार इस समय एक हाई रिस्क चक्र में फंसा हुआ है।
इस संकट के तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, अत्यधिक गर्मी के कारण खेतों से मंडी तक पहुंचते-पहुंचते सब्जियां सूख और सड़ रही हैं। दूसरा, थोक कीमतों में गिरावट आने के बावजूद खुदरा विक्रेता अपने नुकसान की भरपाई के लिए ग्राहकों को पुरानी महंगी दरों पर ही सब्जियां बेच रहे हैं। तीसरा, डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ गया है, जिससे मंडियों में ट्रकों की आवक प्रभावित हुई है।
स्थिति यह है कि मंडी में ५ रुपए प्रति गड्डी बिकने वाली पालक ग्राहक को ४० रुपए में मिल रही है। वहीं, थोक बाजार में ८ से १२ रुपए प्रति किलो बिक रही फूलगोभी खुदरा बाजार में १२० रुपए तक पहुंच गई है। भिंडी १२० रुपए प्रति किलो और प्रâेंच बींस २५० रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। वाशी मार्वेâट के व्यापारियों का कहना है कि पानी की कमी से किसान परेशान हैं और र्इंधन महंगा होने से लागत लगातार बढ़ रही है। यदि मौसम का यही हाल रहा, तो अगले दो से तीन हफ्तों तक जनता को राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
मंडी और बाजार में बढ़ता अंतर
वाशी एपीएमसी में पालक ५ रुपये प्रति गड्डी बिक रही है, लेकिन ग्राहक को वही ४० रुपए में मिल रही है। फूलगोभी थोक में १२ रुपए किलो होने के बावजूद खुदरा बाजार में १२० रुपए तक पहुंच गई है। मंडी और बाजार के बीच बढ़ता अंतर लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
गर्मी और ईंधन ने बढ़ाई महंगाई
भीषण गर्मी से सब्जियां खेत से मंडी पहुंचने से पहले ही खराब हो रही हैं। वहीं डीजल-पेट्रोल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ गया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि मौसम और र्इंधन की कीमतों में राहत नहीं मिली, तो अगले दो-तीन हफ्तों तक सब्जियों के दाम ऊंचे बने रहेंगे।
