सुरेश गोलानी / भायंदर
-सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का मामला
-सालों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बुजुर्ग को मिला न्याय
घर खरीदारों के अधिकारों को सुरक्षित करनेवाले एक निर्णायक फैसले में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अजूरे ट्री टाउनशिप एलएलपी नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी को करीब ७ वर्षों बाद सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए दोषी ठहराया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ७५ वर्षीय शिकायतकर्ता पुरुषोत्तम दास जिंदल द्वारा २०१९ में दाखिल याचिका की सुनवाई के बाद आयोग ने अपने पैâसले में कंस्ट्रक्शन कंपनी और उनके द्वारा मीरा रोड इलाके में निर्मित सृष्टि बिल्डिंग की सोसायटी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए दोषी ठहराते हुए संयुक्त रूप से ब्याज के साथ १.५ लाख रुपए के भुगतान के अलावा इस पूरे मामले के दौरान शिकायतकर्ता को हुए मानसिक /शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में २ लाख रुपए और ५०,००० लिटिगेशन खर्च वसूलने के आदेश पारित किए। मामला २००९ का है जब शिकायतकर्ता ने अजूरे ट्री टाउनशिप नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्मित सृष्टि बिल्डिंग में ३७,२५,२९० रुपये देकर एक फ्लैट खरीदा, जिसकी रजिस्ट्री (सेल डीड) प्रक्रिया जनवरी २०१० में पूरी की गई।
निर्धारित समय में सोसायटी का भी नहीं किया था गठन
महाराष्ट्र ओनरशिप ऑफ फ्लैट्स एक्ट (मोफा) और रेरा के नियमानुसार, बिल्डर द्वारा ४ महीने के भीतर सोसायटी का गठन/ संपत्ति का हस्तांतरण और रिफंडेबल सिक्योरिटी फंड १ साल के भीतर वापस करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन इन दोनों नियमों का कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा उल्लंघन करने के अलावा गैर कानूनी रूप और बिना किसी अधिकार के मेंटेनेंस चार्ज (रखरखाव शुल्क) में ६० प्रतिशत वृद्धि करते हुए ३ रुपए प्रति वर्ग फुट से बढ़ाकर ५ रुपये प्रति वर्ग फुट कर दिया। सोसायटी का गठन आखिरकार अप्रैल २०१३ में किया गया। यह भी आरोप था कि कंस्ट्रक्शन कंपनी ने संपत्ति कर के नाम पर शिकायतकर्ता से ५,२४६ रुपए वसूले, जो मनपा की तिजोरी में जमा ही नहीं किए गए।
