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शिंदे गुट के नेता की ‘पिस्तौल चमकाने’ में चली गोली!

-वाराणसी एयरपोर्ट पर दो कर्मचारियों की जान पर बन आई
-महिला कर्मचारी समेत दो घायल, गोली फर्श से टकराकर उछली
-पिस्तौल में थे २१ जिंदा कारतूस, सुरक्षा प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
-आजमगढ़ से पत्नी के साथ मुंबई आ रहा था कमलेश राय

सामना संवाददाता / मुंबई

देश में सुरक्षा को लेकर चौकसी के बीच वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह शिंदे गुट के नेता और मुंबई के पूर्व नगरसेवक कमलेश केदारनाथ राय की लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चल गई। हथियार की अनिवार्य जांच के दौरान हुई फायरिंग में एयरपोर्ट के दो स्क्रीनिंग कर्मचारी सुमन कुमारी और रोहित राज घायल हो गए। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है।
कमलेश राय अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान से वाराणसी से मुंबई आनेवाले थे। जांच के दौरान उनकी ७.६२ मिलीमीटर की पिस्तौल में २१ जिंदा कारतूस मौजूद थे। घायल कर्मचारियों के मुताबिक, हथियार को खाली दिखाने के प्रयास में ट्रिगर दबाया गया और पिस्तौल से गोली निकल गई। गोली नीचे की सतह से टकराकर उछली और दोनों कर्मचारी उसकी चपेट में आ गए।
‘खाली है’ दिखाने के लिए दबाया ट्रिगर!
घायल स्क्रीनर सुमन कुमारी के अनुसार, हथियार और कारतूस की जांच की जा रही थी। इसी दौरान कमलेश राय ने कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की कि पिस्तौल खाली है और ट्रिगर दबा दिया। रोहित राज ने भी बताया कि मैगजीन निकालने और हथियार देखने के बाद ट्रिगर दबाया गया था। घटना जानबूझकर हुई या गंभीर लापरवाही से, यह जांच का विषय है। मंत्रालय ने फिलहाल इसे आकस्मिक फायरिंग बताया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
नियमों के मुताबिक, विमान से ले जाया जाने वाला हथियार पूरी तरह अनलोडेड होना चाहिए, उसे पहले घोषित करना होता है और हथियार तथा गोला-बारूद के परिवहन के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जांच के दौरान लोडेड हथियार को हाथ में लेकर ट्रिगर दबाने की स्थिति बनी ही क्यों? नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो अब इसी बात की जांच कर रहा है कि तय प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
रिपोर्टों के अनुसार, २०२५ में कमलेश राय के खिलाफ मुंबई के एमआईडीसी पुलिस थाने में एक ठेकेदार से कथित तौर पर रंगदारी मांगने का मामला सामने आया था और पुलिस कार्रवाई भी हुई थी। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया का विषय है, इसलिए इससे जुड़े आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस से थे नगरसेवक, अब शिंदे गुट में
कमलेश राय मूल रूप से आजमगढ़ के रहनेवाले बताए गए हैं। वह २००७ में कांग्रेस के टिकट पर मुंबई मनपा में नगरसेवक चुने गए थे। बाद में वह एकनाथ शिंदे गुट से जुड़े और उन्हें पार्टी का उप नेता बनाया गया है। उनकी पत्नी सुषमा राय भी २०१७ में कांग्रेस की नगरसेवक रह चुकी हैं, जबकि बेटे रितेश राय ने २०२६ के मनपा चुनाव में शिंदे गुट उम्मीदवार के रूप में जीता है।

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