हिमांशु राज
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने २६ मई २०२६ को लखनऊ में कहा कि फर्जी एनकाउंटर लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ गंभीर षड्यंत्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार और पुलिस फर्जी मुठभेड़ों के जरिये भय और दबदबा कायम कर रही है। सपा नेता ने कहा कि लगातार एनकाउंटर कराए जा रहे हैं और जिनकी मर्जी होगी, वे अभियुक्त फर्जी बताए जा रहे हैं। यह प्रवृत्ति न्यायशाही और सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा का अनादर है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धारदार टिप्पणी करते हुए मुठभेड़ों में अभियुक्तों के पैर पर गोली चलाने पर कड़ी नाराजगी जतायी थी, जो चिंता का विषय है। अखिलेश के अनुसार, भाजपा सरकार में फर्जी एनकाउंटर के नाम पर हत्याएं हुई हैं और पुलिस बेलगाम हो चुकी है। यह टिप्पणी विशेषकर जौनपुर एनकाउंटर के बाद आई, जिसमें सपा ने घटना को फर्जी ठहराते हुए तीखा विरोध किया था। सपा अध्यक्ष का एतराज यह संकेत देता है कि पार्टी इसे कानून-व्यवस्था का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी। प्रदेश में कानून-व्यवस्था हमेशा निर्णायक चुनावी विषय रहा है; इसलिए यह मुद्दा सपा को मतदाताओं के बीच प्रमुखता दे सकता है। राजनीतिक लाभ की दृष्टि से यह विषय शहरी शिक्षित मध्यम वर्ग और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति संवेदनशील युवाओं को आकर्षित करेगा। मानवाधिकार संगठन लगातार फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं; सपा को इन संगठनों का समर्थन मिलने की संभावना है, जो दीर्घकालिक लाभ पहुंचा सकता है। साथ ही, पीडीए वाले लोगों के खिलाफ एनकाउंटर की बात मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है, जिससे सपा का धार्मिक-आधारित वोट बैंक मजबूत हो सकता है। सपा अध्यक्ष का यह तीखा हमला पार्टी की विपक्षी गठबंधन में नेतृत्व क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा और मीडिया में व्यापक चर्चा पैदा करेगा, जो चुनावी प्रचार के लिहाज से फायदेमंद होगा। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में पुलिस के खिलाफ नाराजगी है; इसलिए फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा वहां के वोटरों को भी आकर्षित करेगा।
