मुख्यपृष्ठस्तंभसियासी-सरगोशियां : सीएम की जय हो...!

सियासी-सरगोशियां : सीएम की जय हो…!

राज ईश्वरी

आज के नए एपिसोड की शुरुआत करते हैं देवभूमि उत्तराखंड से। महादेव भूमि की हो तो संत-महंत की बात न हो, ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन यहां तो बात हो रही है एक आधुनिक संत की। बेचारे बद्रीनाथ- केदारनाथ धाम में तपस्या करने के बजाय देहरादून सीएम आवास के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। धरने की वजह भी सुन लीजिए। संत जी को हेली सेवा का ठेका नहीं मिला तो तपस्या छोड़कर सियासत में उतर आए। हाथ में त्रिशूल की जगह तख्ती है और मंत्र की जगह नारे। बोल रहे हैं, वीआईपी दर्शन बंद करो। पर सचिवालय के बाबू कान में बता रहे हैं कि असली दर्द वीआईपी का नहीं, टेंडर का है। फाइल का पन्ना पलटते ही खेल समझ आ गया। जिस कंपनी को ठेका मिला, उसके कागज में संत जी के ट्रस्ट का नाम गायब था। बस फिर क्या, धर्म-कर्म छोड़कर सीधे सीएम आवास का घेराव। पुलिस वाले भी कन्फ्यूज हैं। संत को उठाएं तो पाप लगे, बैठा रहने दें तो साहब नाराज हों। अंदरखाने चर्चा ये भी है कि संत जी अकेले नहीं हैं। पीछे-पीछे एक पूर्व मंत्री का हाथ है। मंत्री जी का रिश्तेदार भी उसी टेंडर में हाथ आजमा रहा था। जब बात नहीं बनी तो संत को आगे कर दिया। दिल्ली से भी फोन घनघना रहा है। संगठन ने साफ कहा है कि मामला निपटाओ, चुनावी साल में संत नाराज नहीं होने चाहिए।
टिकट का लॉलीपॉप
अब चलते हैं उत्तर प्रदेश, जहां तबादला एक्सप्रेस १८० की स्पीड से दौड़ रही है। लखनऊ के शक्ति भवन में ३१ मई की रात बिजली गुल नहीं हुई, अफसरों के चेहरे का नूर उड़ गया। मुख्य सचिव की वीडियो कॉल में साफ कह दिया गया, ८ घंटे से ज्यादा कट हुआ तो डीएम घर बैठेगा। उधर अयोध्या में राम पथ की दुकानों पर महाभारत छिड़ी है। विधायक जी कह रहे हैं लिस्ट मैं बनाऊंगा, मेयर साहिबा बोलीं ठेका मेरे आदमी को जाएगा। मामला सीएम दरबार पहुंचा तो फाइल पर नोट लगा, दोनों को बुलाओ। पूर्वांचल के एक बाहुबली को टिकट का लॉलीपॉप पकड़ा दिया गया है। शर्त ये है कि जिले में शांति रखो और दूसरे गुट की परेड मत निकलवाओ। नेताजी खुश हैं, पर उनके चेले टेंशन में हैं कि टिकट मिला तो खर्चा कौन उठाएगा।
बंगले पर लालटेन!
अगला स्टेशन बिहार है, यहां राज्यसभा की सीट का रेट खुल गया है। पटना में १ जून की सुबह जेडीयू दफ्तर में हलचल कुछ ज्यादा ही थी। ललन सिंह की ताजपोशी की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। मतलब साफ है, ५वीं सीट जेडीयू अपनी जेब में रखेगी। मांझी दिल्ली भागे, पर फ्लाइट लैंड होने से पहले ही जवाब आ गया, अभी वेटिंग में रहो। तेजस्वी के बंगले पर रात को लालटेन जलती रही। प्लान बन रहा है कि खेल कैसे बिगाड़ा जाए। एक केंद्रीय मंत्री के पीए का फोन तो सर्विलांस पर है ही, अब एक और सांसद जी के ड्राइवर का नंबर भी रडार पर आ गया है। टिकट के बदले लेनदेन वाली ऑडियो क्लिप मार्केट में घूम रही है। बोल रहे हैं, ५ करोड़ एडवांस, सीट कन्फर्म। अब राजस्थान का नंबर, यहां पेपर लीक से ज्यादा चैट लीक की चर्चा है।

व्हॉट्सऐप चैट!
जयपुर में एक महिला मंत्री और बड़े अफसर की व्हॉट्सऐप चैट वायरल हो गई। मैडम लिख रही हैं, पेपर रद्द मत करो, मेरे वाले २० लड़के पास होने हैं। सीएमओ ने तुरंत फरमान जारी किया, सब अफसर फोन जमा करो। वसुंधरा राजे ने चैट का प्रिंटआउट निकाल लिया है। कल झालावाड़ की रैली में पढ़कर सुनाएंगी। उधर एक राजघराने के कुंवर साहब को बीजेपी में लाने के लिए दिल्ली से खास दूत आया है। डील ये है कि टिकट पक्की, पर पहले कांग्रेस छोड़ने का एलान मंच से करना पड़ेगा। गहलोत गुट ने भी काउंटर प्लान तैयार कर लिया है। बोल रहे हैं, तुम्हारे पास राजा है तो हमारे पास प्रजा है।
ऊपर तक बात
आखिरी पड़ाव मध्य प्रदेश, यहां आग लगते ही फाइलें जल जाती हैं। भोपाल मंत्रालय में ३१ मई की रात शॉर्ट-सर्किट हुआ। कमाल ये कि फायर ब्रिगेड से पहले क्राइम ब्रांच पहुंच गई। आग लगी थी लाडली बहना वाले सर्वर रूम में। विपक्ष चिल्ला रहा है कि नए नाम जोड़ने का सबूत जलाया गया है। सरकार कह रही है एसी में ब्लास्ट हुआ। इंदौर मेट्रो का टेंडर रद्द होने की असली वजह भी सामने आ गई। जिस कंपनी को काम मिला था, वो सीएम के समधी के जिगरी दोस्त की निकली। फाइल वापस मंगाई गई तो ठेकेदार बोला, ऊपर तक बात हो गई थी। अब १ जून से बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू हुई है। १०:३० के बाद अंगूठा लगाया तो आधे दिन की सैलरी गई। बाबू लोग बोल रहे हैं, नेता टाइम से आएं तो हम भी आएं। तो ये थी आज की पांच राज्यों की कच्ची-पक्की गॉसिप। सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा, ये तो वक्त बताएगा। पर इतना तय है कि कुर्सी के लिए लड़ाई में संत भी धरने पर बैठ जाता है और अफसर भी फाइल जला देता है। अगला एपिसोड लेकर फिर हाजिर होंगे। तब तक जुड़े रहिए।
(डिस्क्लेमर: ये सभी चर्चाएं सियासी गलियारों, कार्यकर्ताओं और मीडिया की ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत पर आधारित हैं। इनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। मकसद सिर्फ मनोरंजन है, किसी की मानहानि करना नहीं।)

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