एम एम एस
नई मुंबई के खारघर, ऐरोली, सानपाडा, नेरुल और जुई नगर के निवासी शिकायत कर रहे थे कि नलों से ‘मिनरल वाटर’ की जगह ‘गटर गंगा’ प्रवाहित हो रही है। गंदे पानी की तस्वीरें अखबारों और सोशल मीडिया पर तैर रही थीं और नागरिक उल्टी-जुलाब से परेशान थे। स्थानीय नगरसेवक का प्रेम पत्र भी म्युनिसिपल कमिश्नर तक पहुंचा, मगर क्या मजाल अहंकारी प्रशासन के कानों पर जूं रेंग जाए! वे तो घोड़े बेचकर कुंभकर्णी नींद सोते रहे।
जब नागरिकों का आक्रोश बढ़ा और ‘पानी के सिर से ऊपर चले जाने’ की नौबत आ गई तो प्रशासन हड़बड़ाकर जागा। आनन-फानन में मेयर साहिबा ने ‘मोरबे डैम’ का दौरा कर डाला। अखबारों और मीडिया की खबरों को औचित्य हीन साबित करने के लिए उन्होंने वहां का पानी पीकर ऐसी विजयी मुस्कान बिखेरी, मानो कोई तीर मार लिया हो! जनता पूछ रही है, ‘मैडम, अगर सब चंगा सी, तो यह हेल्पलाइन और एडवाइजरी का झुनझुना क्यों थमाया?’ इस ‘जल-अभिनय’ के बीच जनता का संकट टला नहीं; लोग इस भीषण गर्मी में जेबें ढीली कर पानी खरीद-खरीद कर प्यास बुझाते रहे। अगर मेयर साहिबा डैम जाकर फोटो-सेशन और स्टंट करने के बजाय पहले ही शिकायतों पर ध्यान देतीं तो न जनता बीमार होती और न ही उन्हें अपनी जान हथेली पर लेकर डैम का पानी पीना पड़ता!
अब सुना है कि हुजूर ने पानी जांच करनेवाली ‘खोजी टीम’ का गठन किया है, जो इलाकों में जाकर पानी की क्वॉलिटी चेक करेगी। अरे साहब, यह जनता पर कोई परोपकार नहीं है, टैक्स वसूलने के बदले यह आपका बुनियादी फर्ज है!
जैसे ही यह खबर आई, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक त्रस्त नागरिक ने लिखा, ‘मैडम, एसी गाड़ियों से उतरकर कभी स्लम की झोपड़पट्टी में आइए और सीधे नल से टपकता वह बदबूदार ‘अमृत’ पीने का साहस दिखाइए!’ दूसरे ने सवाल किया, ‘स्लम वस्तित मेडम किंवा आयुक्त कधी येणार?’ ये महज कमेंट नहीं हैं, बल्कि ‘सैटेलाइट सिटी’ की चमचमाती कतरन के पीछे जानवर जैसी जिंदगी जीने को मजबूर जनता का तीखा आक्रोश है। काश, यह सोता हुआ तंत्र वक्त रहते जागा होता! एक लंबे अरसे बाद जनप्रतिनिधियों के ‘दर्शन-लाभ’ शुरू हुए हैं मगर ज्यादातर नगरसेवकों की भूमिका भी ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ जैसी ही है। फिर भी, जिन एक-आध ने आवाज (सुनील कुरकुटे, शैला पाटील) उठाई, वे तारीफ के काबिल हैं। रही बात कमिश्नर साहब की तो वे तो ठहरे सरकारी मेहमान… और मेहमानों से काम की उम्मीद करना मतलब ‘बबूल के पेड़ से आम मांगना’ है!
