उमा सिंह
मथुरा में आईआईटी-शिक्षित एक कथित बाबा पर युवतियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर फंसाने, शोषण और ब्लैकमेल करने के आरोप लगे हैं।
कभी आईआईटी की डिग्री देखकर माता-पिता अपने बच्चों को प्रेरणा दिया करते थे। आजकल कुछ लोग उसी डिग्री को बोर्ड की तरह टांगकर `आध्यात्मिक स्टार्टअप’ चला रहे हैं। फर्क बस इतना है कि पहले लोग इंजीनियर बनकर मशीनें चलाते थे, अब कुछ कथित `बाबा’ लोगों की भावनाएं और भरोसा चलाने में जुटे हैं।
संतों की नगरी मथुरा से आई कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यहां एक आईआईटी-शिक्षित इंजीनियर ने कथित तौर पर अध्यात्म का ऐसा चोला ओढ़ा कि पढ़ी-लिखी युवतियां भी उसके जाल में फंसती चली गईं। पुलिस के मुताबिक, भुवनेश्वर का रहनेवाला अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता खुद को आध्यात्मिक गुरु बताता था, लेकिन उसके कथित कारनामों ने `गुरु’ शब्द की गरिमा पर ही सवाल खड़े कर दिए। यूं तो कोई भी संत लोगों को सद््मार्ग का रास्ता बताते हैं लेकिन ऑनलाइन ज्ञान, ध्यान और मोक्ष का पैकेज बेचने वाले इस बाबा का असली कारोबार कुछ और ही था। दरअसल, वह युवतियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर अपने ठिकाने तक बुलाता, फिर नशीला पदार्थ देकर उनका शोषण करता और वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करता था। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि उसके निशाने पर खासतौर पर बीटेक और एमटेक जैसी डिग्रियां हासिल कर चुकी युवतियां रहती थीं। यानी बाबा ने शायद भक्त चुनने के लिए भी `एजुकेशनल क्वालिफिकेशन’ तय कर रखी थी।
यह घटना सिर्फ एक कथित ढोंगी बाबा की कहानी नहीं है। यह उस अंधभक्ति का आईना भी है, जिसमें लोग किसी की डिग्री, वेशभूषा या मीठी बातों में आकर बिना सवाल किए भरोसा कर लेते हैं। आजकल आध्यात्मिकता भी सोशल मीडिया पर चल रही है और कुछ लोग `ज्ञान’ के नाम पर `जाल’ बिछाने में लगे हैं। इसलिए अगली बार कोई बाबा आपको मोक्ष, ऊर्जा, चमत्कार या ब्रह्मज्ञान का शॉर्टकट बेचता नजर आए तो उसकी डिग्री से पहले उसकी नीयत जरूर जांच लीजिए, क्योंकि आज के दौर में असली परीक्षा भक्तों की नहीं, बाबाओं की होनी चाहिए। बाकी तो सब गजबे है…!
