मुख्यपृष्ठस्तंभमालिकों के मालिकों का खेल व्यवस्था का पतन; शर्म मगर आती नहीं...!

मालिकों के मालिकों का खेल व्यवस्था का पतन; शर्म मगर आती नहीं…!

एनसीएलटी के माध्यम से दिवालिया घोषित की गई एक कंपनी को खरीदने के लिए दो कंपनियों ने बोली लगाई।
मालिकों के मालिकों की बोली कम थी, फिर भी कंपनी उन्हें मिल गई। पूरा व्यवहार कागजों पर कानूनी बताया गया। दूसरी कंपनी ने, जिसकी बोली अधिक थी, यह कहते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया कि ज्यादा बोली लगाने के बावजूद उसे कंपनी नहीं मिली। अदालत ने कहा, एनसीएलटी स्वयं एक न्यायिक मंच है, उसका निर्णय अंतिम है। सब कुछ कानूनी बताया गया।
अब जो कंपनी अदालत गई थी, उस पर ईडी की छापेमारी हो गई। किस कंपनी पर छापे पड़े हैं, सभी जानते हैं। जांच एजेंसियां अब केवल सरकार की बंधुआ नहीं रहीं, बल्कि वे मालिकों के मालिकों की वेतनभोगी नौकर भी बन चुकी हैं। किसी को हवाई अड्डे की व्यवस्था दिलवाने से लेकर तमाम ठेके दिलाने में अब इन्हीं की मेहनत महत्वपूर्ण होती है।
हर दिन लगता है कि व्यवस्था का इससे ज्यादा पतन हम क्या देखेंगे, लेकिन अगले ही दिन यह भ्रम टूट जाता है।
ये लोग शर्म की सारी सीमाएं लांघकर ज्यादा से ज्यादा नीचे गिरने का नया रिकॉर्ड बना देते हैं।
(सोशल मीडिया से साभार)

अन्य समाचार