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हिंजवड़ी की आईटी कंपनी रातोंरात बंद…७०० इंजीनियरों पर संकट!.. ‘थिंकटेक’ का संचालक नासिक से गिरफ्तार

सुनील ओसवाल / मुंबई

पुणे के हिंजवड़ी आईटी पार्क स्थित ‘थिंकटेक इंडिया प्रा. लि.’ कंपनी के अचानक बंद हो जाने से करीब ७०० आईटी इंजीनियरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों की शिकायतों के बाद हिंजवड़ी पुलिस ने कंपनी के संचालक हर्षल ठाकरे को नासिक से गिरफ्तार किया है। मामले में आर्थिक अनियमितता और कर्मचारियों से डिपॉजिट के नाम पर रकम लेने के आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, कंपनी में कार्यरत कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि जॉइनिंग के समय उनसे लैपटॉप डिपॉजिट के नाम पर लगभग १५-१५ हजार रुपए जमा कराए गए थे। इसके अलावा जनवरी महीने से कई कर्मचारियों के वेतन भी लंबित थे। प्रबंधन की ओर से लगातार भुगतान का आश्वासन दिया जा रहा था, लेकिन अचानक कंपनी का कार्यालय बंद कर दिया गया।
पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
बताया जाता है कि जब कर्मचारी रोज की तरह कार्यालय पहुंचे तो वहां ताले लगे मिले। इसके बाद कर्मचारियों ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शुरुआती दौर में कुछ कर्मचारियों ने शिकायत दी थी, लेकिन पिछले पंद्रह दिनों में शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़कर ३० से ४० तक पहुंच गई। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आर्थिक धोखाधड़ी और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान कंपनी संचालक हर्षल ठाकरे के नासिक में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
आईटी क्षेत्र में चिंता का माहौल
हिंजवड़ी देश के प्रमुख आईटी केंद्रों में गिना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रभावित होने से आईटी क्षेत्र में भी चिंता का माहौल है। कई कर्मचारियों ने कहा है कि वेतन बंद होने और नौकरी अचानक खत्म हो जाने से उनके सामने घर का किराया, ईएमआई और अन्य खर्चों का संकट खड़ा हो गया है।
संचालक, प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध
हिंजवड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालाजी पांढरे ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के आर्थिक व्यवहारों की विस्तृत जांच की जा रही है। कर्मचारियों से जमा कराई गई डिपॉजिट राशि, बकाया वेतन और बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कर्मचारियों से डिपॉजिट लेने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था और कंपनी प्रबंधन के अन्य अधिकारियों की इसमें क्या भूमिका रही। संबंधित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

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